मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय की फर्जी नियुक्तियों पर उच्च न्यायलय का आदेश आते ही हुआ बड़ा खुलासा

*सुभाष ठाकुर******** 

सच्चाई के पथ पर फल की इच्छा नहीं कर्म को ही फल मानकर सच्चाई की जीत संभव ।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय में एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने पाया कि प्रतिवादी नंबर 2 का शिक्षण अनुभव संदिग्ध था, क्योंकि इटरनल यूनिवर्सिटी ने पहले उनके रिकॉर्ड से इनकार किया था, और बाद में दावा किया गया कि रिकॉर्ड प्राकृतिक आपदा में नष्ट हो गए थे।

सरदार वल्लभभाई पटेल क्लस्टर यूनिवर्सिटी, मंडी ने विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन संख्या 01/2021 जारी किया था, जिसमें जूलॉजी विषय में सहायक प्रोफेसर के चार पद शामिल थे। नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन की कमी के कारण न्यायालय ने नियुक्ति को रद्द कर दिया।

उच्च न्यायालय ने नियुक्ति को रद्द कर दिया और अगले उम्मीदवार को नियुक्ति का प्रस्ताव देने का निर्देश दिया।

हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि इटरनल यूनिवर्सिटी में 2008 से 2009 तक के शिक्षण अनुभव पर विचार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि यूनिवर्सिटी ने स्वयं प्रतिवादी नंबर 2 के वहां काम करने के तथ्य से इनकार किया था।इटरनल यूनिवर्सिटी का इनकार*: यूनिवर्सिटी ने प्रतिवादी नंबर 2 के वहां काम करने के तथ्य से इनकार किया था। बाद में प्रस्तुत किए गए प्रमाण पत्र में अलग-अलग तारीखें थीं।  फैसले में यह भी कहा गया है कि  उक्त अवधि के दौरान यूनिवर्सिटी में बीएससी या एमएससी की कक्षाएं नहीं चल रही थीं।

याचिकाकर्ता ने पुरस्कार  शीर्षक के तहत ’03’ अंकों के पुरस्कार को चुनौती दी है।

उच्च न्यायलय ने फैसले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि प्रतिवादी नंबर 2 के पति ने नियुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

8 अप्रैल 2023 को अमर ज्वाला समाचार पेपर ने मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय की फर्जी नियुक्तियों के मामले का सबसे पहले खुलासा किया हुआ था।

मंडी सरदार पटेल विश्वविद्याल के मामले का खुलासा होते ही मंडी राजमहल में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रेस वार्ता कर सरदार पटेल विश्वविद्यालय में उनकी भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई प्रोफेसरों की नियुक्तियों उचित ठहराया था, और अमर ज्वाला के संपादक सुभाष ठाकुर को कहा था कि वह तथ्यों को जांचे बिना यह विश्वविद्यालय के खिलाफ एजेंडा चला रहे हैं । फर्जी नियुक्ति का मामला राहुल भारद्वार द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसे उच्च न्यायलय ने नियुक्ति को रद्द किया जिसे पूर्व मुख्यमंत्री नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर उचित ठहरा चुके थे । प्रेस वार्ता में एक पत्रकार द्वारा यह तक बोल दिया था कि मामले की विजलेंस जांच हो चुकी उसमें फर्जी नियुक्तियों के मामले में कुछ नहीं पाया । प्रेस वार्ता में नेताप्रतिपक्ष का भरपूर सहयोग किया गया था।

इन बिंदुओं पर विश्वविद्यालय प्रशासन क्या कार्यवाही करेगा ? 

1. नकली दस्तावेजो की स्क्रीनिंग कमिटी द्वारा जाँच क्यों नहीं की गयी

2. स्क्रीनींग कमिटी ने ऐमफील औऱ PHD के बिना वाले एक्सपीरियंस को कैसे मान्यता दे दी

3. एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच / वैरिफिकेशन कमेटी डाक्यूमेंट्स को कैसे संबधित यूनिवर्सिटी या कॉलेज से सत्यता जाने बिना वेरीफिकेशन कर दी

4. सिलेक्शन कमिटी ने ये सब देख के आँखे क्यों मूँद ली

5. तथ्य साबित होने पे यूनिवर्सिटी क्या डिसीजन लेगी,

6. क्या यूनिवर्सिटी गलत दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिये उचित कार्यवाही करेगी

7. जो अध्यापक नकली दस्तवेज देके 3 साल छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर गया उसकी भरपाई कौन करेगा

8. क्या यूनिवर्सिटी नॉन डेसेर्वेग उम्मीदवार को फर्जी दस्तवेज देने के आधार पे नौकरी देने के बाद रिकवरी करेंगी

9. यूनिवर्सिटी के साथ दस्तावेज के द्वारा हुये फ़्रॉड के लिये किसको जिमेवार ठहराएगी, औऱ वित्तीय नुकसान की भरपाई कैसे करेगा ?

उच्च न्यायलय में 1 सितम्बर को इसी मामले की आखिरी तारीख लगी हुई थी।

उच्च न्यायलय के आदेश आते ही अमर ज्वाला की वो खबर भी पूर्ण रूप से सत्य पाई गई है और मंडी विश्वविद्याल में लगभग दो दर्जन ऐसे ही अन्य मामले न्यायलय में विचाराधीन है। आज जैसे ही उच्च न्यायलय के यह ऑडर उच्च न्यायलय की वेबसाईट पर आए , प्रदेश के ऐसे सैकड़ों प्रोफेसरों ने जिन्हें एपीआई स्कोर के उच्चतम सूची होते हुए भी नियुक्तियों से बाहर किया हुआ है। उनके द्वारा उच्च न्यायालय के यह आदेश आज बुधवार की शाम होते ही वॉट्सएप पर खूब वायरल किया जा रहा है।

उच्च न्यायालय के आदेश वॉट्सएप पर आते ही मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों तथा गैर शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ चुकी है। अमर ज्वाला ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय के कुलपति ललित अवस्थी से मामले की जानकारी लेनी चाही लेकिन उन्होंने फोन नहीं सुना।

शिमला विश्वविद्यालय,केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में हुई कई दर्जन प्रोफेसरों ,सहायक प्रोफेसरों तथा एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियों पर फर्जीवाड़े के समाचार प्रकाशित हुए हैं । लेकिन इन सभी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा मामले पर उचित कदम कभी नहीं उठाया । उच्च न्यायलय से एक के बाद एक लगभग 5 सहायक और एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्तियों अभी तक रद्द हो चुकी है ।शिमला विश्वविद्यालय की 3 पालमपुर कृषि विश्वद्यालय से 1 और सरदार पटेल विश्वविद्यालय से 1 सहायक प्रोगेसर की नियुक्ति रद्द हो चुकी है।

अमर ज्वाला के संपादक सुभाष ठाकुर को कई प्रोफेसरों द्वारा समाचार प्रकाशित करने पर अनेकों बार धमकियां तक देते रहे लेकिन सुभाष ठाकुर ने फर्जी नियुक्तियों के मामलों को पूरी निष्पक्षता और निर्भीकता से उजागर करते रहे हैं ।

*बॉक्स*

उच्च न्यायालय के आदेशों में यह भी पाया कि चयन समिति को दस्तावेजों का सत्यापन करने का निर्देश दिया गया है। न्यायालय ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन के महत्व पर जोर दिया है।

*बॉक्स* :-

*विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्तियों का मामला*

मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय में लगभग दो दर्जन शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों का मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा है। आरटीआई एक्टिविस्ट विपिन गुलेरिया ने इस मामले का खुलासा किया था। इसके अलावा, अमर ज्वाला समाचार पत्र ने भी इस मुद्दे पर खबरें प्रकाशित की हैं।

*अन्य विश्वविद्यालयों में भी फर्जी नियुक्तियां*

केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला, शिमला विश्वविद्यालय और पालमपुर कृषि विश्वविद्यालय में भी फर्जी नियुक्तियों के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में भी उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई हैं और कई मामलों में नियुक्तियां रद्द की जा चुकी हैं।

मंडी सरदार पटेल विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्तियों का मामला उच्च न्यायालय के ध्यान में आया है और न्यायालय ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यापन के महत्व पर जोर दिया है। यह मामला हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नियुक्ति प्रक्रिया की जांच और सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है ।

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