आटा मिलों पर सख्त हुई सरकार 100 किलो गेहूं से 96 किलो आटा: खाद्य आपूर्ति आयोग के चेयरमैन ने उठाए सवाल

खाद्य आपूर्ति आयोग के चेयरमैन एस.पी. कटियाल ने आटा मिलों की खोली पोल

अमर ज्वाला // ऊना 

उचित मूल्य दुकानों (डिपो) में वितरित किए जा रहे आटे की गुणवत्ता को लेकर प्रदेशभर में उठ रहे सवाल अब सरकार के स्तर तक पहुंच गए हैं। हिमाचल प्रदेश खाद्य आपूर्ति आयोग के चेयरमैन एस.पी. कटियाल ने आटा मिलों की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करते हुए सख्त रुख अपना लिया है।

इन दिनों जिला ऊना के दौरे पर पहुंचे आयोग चेयरमैन ने शुक्रवार को जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों के साथ एक आटा मिल का औचक निरीक्षण किया और मिल से निकलने वाले आटे के सैंपल भरे। निरीक्षण के दौरान सामने आए तथ्यों ने आटा मिलों के दावों पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

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एस.पी. कटियाल ने कहा कि सरकार द्वारा अनुदान पर दी जाने वाली गेहूं का उद्देश्य राशनकार्ड धारकों को गुणवत्तायुक्त आटा उपलब्ध करवाना है, लेकिन प्रदेश के कई जिलों से लगातार आटे की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि 25 दिसंबर 2025 को मंडी जिले में भरे गए आटे के सैंपल प्रयोगशाला में पास हो गए, लेकिन आटे से निकाले गए करीब 25 प्रतिशत चोकर की जांच रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई।

चेयरमैन ने स्पष्ट किया कि चोकर के सैंपल की रिपोर्ट इसलिए लंबित रही क्योंकि प्रयोगशाला शुल्क जमा नहीं किया गया था। अब राशि जमा कर दी गई है और बहुत जल्द रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

आटा मिलों पर सवाल उठाते हुए एस.पी. कटियाल ने कहा कि नियमों के अनुसार 100 किलो गेहूं में करीब 6 प्रतिशत वेस्ट निकलने पर लगभग 94 किलो आटा बनना चाहिए। इसके बावजूद कुछ मिलों द्वारा 96 किलो आटा दर्शाया जा रहा है, जबकि सूजी और मैदा अलग से निकाला जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया—जब अतिरिक्त उत्पाद निकाले जा रहे हैं, तो आटे की मात्रा अधिक कैसे दिखाई जा रही है?

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उन्होंने आशंका जताई कि या तो निम्न गुणवत्ता की गेहूं की खरीद की जा रही है या फिर आटे में बाहरी सामग्री की मिलावट हो रही है। चेयरमैन ने दो टूक कहा कि अब आटा मिल मालिकों को रिकॉर्ड के साथ यह साबित करना होगा कि गेहूं से कितना आटा, सूजी, मैदा और वेस्ट निकल रहा है।

खाद्य आपूर्ति आयोग के चेयरमैन ने कहा कि राशनकार्ड धारकों को हर हाल में गुणवत्तायुक्त आटा दिलवाया जाएगा और इसके लिए आटा मिलों के रिकॉर्ड की सख्ती से जांच की जाएगी। उन्होंने संकेत दिए कि अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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