सुभाष ठाकुर*******
मंडी जिले में उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से वितरित किए जा रहे आटे की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। कंडाघाट स्थित कम्पोजिट टेस्टिंग लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट में पीडीएस से जुड़े ब्रान (चोकर) का सैंपल मानकों पर खरा नहीं उतरा और इसे सबस्टैंडर्ड घोषित किया गया है।
इस पूरे मामले को अमर ज्वाला साप्ताहिक समाचार पत्र ने प्रमुखता से उठाया था। यही नहीं, इस मुद्दे की सच्चाई सामने लाने के लिए प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन डॉ एस पी कत्याल स्वयं फील्ड में पहुंचे थे। मंडी शहर के एक उचित मूल्य की दुकान (डिपो) में मौके पर 2 किलो आटे का वजन करवाया गया , आटे को छन्नी से छान कर मालूम हुआ कि 2 किलो आटे में से खाने के योग्य 1 किलो 510 ग्राम आटा जबकि 490 ग्राम चोकर पाई गई । प्रदेश राज्य खाद्य आयोग के चेयरमैन डॉ एसपी कत्याल ने उसी आटे तथा उससे निकलने वाले चोकर के सैंपल भरे गए थे
यह सैंपल सिविल सप्लाई के एरिया मैनेजर संजीव वर्मा, खाद्य आपूर्ति विभाग के निरीक्षण अधिकारी पवन कुमार व महिला निरीक्षण अधिकारी मीरा की मौजूदगी में भरे गए थे और उन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था।

अब लंबे समय बाद आई लैब रिपोर्ट के अनुसार, सैंपल में नमी और कच्चे प्रोटीन की मात्रा तय मानकों के अनुरूप नहीं है। यह मानक FSSAI द्वारा बनाए गए नियम 2.4.29 के अंतर्गत निर्धारित किए गए हैं। जांच में सैंपल इन मानकों पर खरा नहीं उतरा, इसलिए इसे निम्न स्तर (सबस्टैंडर्ड) घोषित किया गया है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद यह आरोप भी गहराने लगे हैं कि आटा मिलों के साथ मिलीभगत के चलते सिविल सप्लाई से जुड़े कुछ अधिकारियों द्वारा वर्षों से निम्न स्तर का आटा उचित मूल्य की दुकानों में सप्लाई किया जाता रहा। सस्ती दरों पर मिलने वाले इस आटे के नाम पर आम जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने की बात अब जांच रिपोर्ट से उजागर होती नजर आ रही है।
आटे और चोकर की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह भी साफ हो गया है कि वर्षों से हिमाचल प्रदेश में उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से आम लोगों को निम्न गुणवत्ता का आटा उपलब्ध कराया जाता रहा, जबकि विभागीय अधिकारियों की खामोशी इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े कर रही है।
अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद संबंधित विभाग और सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: डॉ एसपी कत्याल
डॉ एस पी कत्याल, चेयरमैन, हिमाचल प्रदेश राज्य खाद्य आयोग ने कहा कि प्रयोगशाला जांच में पीडीएस से जुड़े चोकर (ब्रान) का सैंपल निम्न स्तर का पाया जाना बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि उचित मूल्य की दुकानों में वर्षों से निम्न गुणवत्ता का आटा सप्लाई किया गया है तो इसके लिए जिम्मेदार सिविल सप्लाई के अधिकारी और संबंधित आटा मिल किसी भी हालत में बख्शे नहीं जाएंगे।
कत्याल ने चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की सप्लाई से न जाने कितने लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हुआ होगा। उन्होंने बताया कि इस मामले की पूरी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी और दोषी अधिकारियों तथा आटा मिल के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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