चार महीने की लंबी प्रक्रिया के बाद एक करोड़ से अधिक में मछली पकड़ने का ठेका आवंटित, पारदर्शिता पर उठे सवाल
सुभाष ठाकुर*******
पठानकोट/चंबा: रंजीत सागर बांध परियोजना की विशाल झील में मछली पकड़ने का ठेका आखिरकार चार महीने की लंबी प्रक्रिया और कई बार टेंडर स्थगित होने के बाद एक करोड़ तीन लाख 11 हजार 407 रुपये में आवंटित कर दिया गया। यह ठेका हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर निवासी और जाने-माने मछली कारोबारी मोहम्मद आफताब के नाम हुआ है, जिनकी पहचान प्रदेश ही नहीं बल्कि बाहरी राज्यों में भी बड़े स्तर के ठेकेदार के रूप में है।
करीब 7750 एकड़ क्षेत्र में फैली इस झील के लिए विभाग द्वारा कई बार खुली बोली आमंत्रित की गई, लेकिन प्रक्रिया बार-बार अटकती रही। जानकारी के अनुसार, चंबा जिला के बनीखेत स्थित कॉपरेटिव संधारा सोसायटी पर आरोप लगे कि वह अधिक बोली लगाने वाले ठेकेदार को टेंडर देने में आनाकानी कर रही थी और पुराने ठेकेदार को कम रेट पर फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी, जिससे सरकार को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका बनी हुई थी।
इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाने का काम ठेकेदार मोहम्मद आफताब ने किया। उन्होंने खुलकर अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई और विभागीय अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई। उनके इस कदम के बाद मत्स्य विभाग के निदेशक ने मामले का कड़ा संज्ञान लिया, जिसके चलते प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाया गया।
आखिरकार विभाग को कई बार रिजर्व प्राइस में बदलाव करना पड़ा और लंबी जद्दोजहद के बाद यह ठेका आफताब को आवंटित किया गया। आफताब ने बताया कि पूर्व में भी उन्होंने इस झील का ठेका लिया था, लेकिन भारी बारिश और बाढ़ जैसी परिस्थितियों के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बावजूद उन्होंने इस बार फिर ठेका लेकर बेहतर कार्य करने का भरोसा जताया है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ठेका शर्तों के तहत कुल राशि का 25 प्रतिशत तीन दिनों के भीतर जमा करवाना होगा, जबकि शेष 75 प्रतिशत राशि किस्तों में अदा की जाएगी। इस बार झील में जलस्तर बेहतर होने और मछली बीज डाले जाने के कारण उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि आफताब जैसे ठेकेदार आवाज न उठाते तो सरकारी राजस्व को नुकसान हो सकता था। फिलहाल, ठेका प्रक्रिया पूरी होने के बाद पारदर्शिता को लेकर विभाग राहत की स्थिति में है, वहीं आफताब के इस कदम को ईमानदार कारोबार और सिस्टम में सुधार की दिशा में एक मजबूत पहल माना जा रहा है।
