चौहार घाटी: दूध जांच मशीनों की कमी, भुगतान में देरी से पशुपालक नाराज़

सुभाष ठाकुर******** 

मंडी के नेरचौक चक्कर में स्थित मिल्क प्लांट के मैनेजर विश्वकांत शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि हिमाचल प्रदेश में करीब 282 दूध एकत्रित करने वाली सोसायटियां कार्यरत हैं। इनमें से कई सोसायटियों के पास दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक यंत्र उपलब्ध हैं, जबकि लगभग 50 से 60 सोसायटियां अभी भी इस सुविधा से वंचित हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दूध के समर्थन मूल्य में काफी वृद्धि की गई है, ऐसे में स्थानीय सोसायटियां अपनी आय से गुणवत्ता जांचने वाली मशीनें स्वयं खरीद सकती हैं। मिल्क प्लांट द्वारा सोसायटियों को 5 प्रतिशत कमीशन भी दिया जा रहा है, जिससे उनके पास पर्याप्त धन उपलब्ध है।

मैनेजर विश्वकांत शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में दूध की खरीद इलेक्ट्रॉनिक मीटर से गुणवत्ता जांच के बाद ही की जा रही है और बिना जांच के दूध नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि पहले के समय में बिना मशीनों के भी दूध की खरीद होती थी, लेकिन अब आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ रहा है।

हालांकि, चौहार घाटी के दुर्गम क्षेत्रों के पशुपालकों ने इस दावे पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई महीनों से मांग करने के बावजूद उनके क्षेत्रों में दूध की गुणवत्ता जांचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक यंत्र कई सोसायटियों के पास उपलब्ध नहीं कराए हैं। पशुपालकों का आरोप है कि प्रदेश की 282 सोसायटियों में से कुछ सोसायटियों को मिल्क प्लांट प्रबंधन द्वारा यह सुविधा नहीं दी जा रही है बल्कि सोसायटियों को खुद यह यंत्र रखने को कहा जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा है कि जैसे जैसे उनके पास यह इलेक्ट्रॉनिक यंत्र उपलब्ध होंगे तो उन्हें मुहैया करवाए जाएंगे लेकिन वर्तमान में मिल्क प्लांट के पास कोई भी यंत्र उपलब्ध नहीं है।

बॉक्स

दुग्ध उपकेंद्र सनवाड के प्रधान जगदीश कुमार का बयान

दुग्ध उपकेंद्र सनवाड के प्रधान जगदीश कुमार ने बताया कि जनवरी माह से लेकर अब तक मिल्क प्लांट की ओर से उन्हें 5 प्रतिशत कमीशन अभी तक नहीं मिली , यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि पशुपालकों को उनके दूध का भुगतान भी समय पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि उन्होंने मिल्क प्लांट के निरीक्षण अधिकारी के समक्ष दुग्ध गुणवत्ता जांचने वाले इलेक्ट्रॉनिक यंत्र का मुद्दा भी उठाया था। इस पर अधिकारी द्वारा उन्हें बताया गया कि वर्तमान में प्लांट के पास ऐसे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र उपलब्ध नहीं हैं।

प्रधान जगदीश कुमार ने कहा कि यदि दुग्ध उपकेंद्र (सोसायटी) सनवाड के सभी शेयरधारक सहयोग करते हैं, तो वे स्वयं भी इलेक्ट्रॉनिक मीटर (यंत्र) खरीदने के लिए अपना योगदान देने को तैयार हैं।

उन्होंने सरकार और मिल्क प्लांट प्रबंधन से मांग की है कि पशुपालकों के दूध की खरीद का भुगतान समय पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि पशुपालक अपने रोजमर्रा के खर्चों को आसानी से पूरा कर सकें।

पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उनके दूध की खरीद इलेक्ट्रॉनिक जांच के आधार पर नहीं की गई, तो वे मजबूर होकर मिल्क फेडरेशन के चेयरमैन और मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगे तथा उचित कदम उठाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *