कीह मठ में 14वें दलाई लामा के पावन पदचिह्नों के दर्शन, श्रद्धालुओं ने लिया आशीर्वाद

विश्व शांति, करुणा और मानव कल्याण की कामना के साथ संपन्न हुआ विशेष धार्मिक समारोह

अमर ज्वाला // स्पीति

स्पीति घाटी स्थित ऐतिहासिक कीह मोनेस्ट्री (कीह गोम्पा) में शुक्रवार प्रातः 10 बजे परम पावन 14वें दलाई लामा के पावन पदचिह्नों के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए एक विशेष धार्मिक समारोह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं, बौद्ध अनुयायियों तथा देश-विदेश से पहुंचे भक्तों ने पावन पदचिह्नों के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

समारोह के दौरान गोम्पा में विशेष प्रार्थनाएं, मंगलकामना पाठ तथा पारंपरिक बौद्ध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। सभी प्रार्थनाओं का केंद्र विश्व शांति, करुणा, मानवता और समस्त प्राणियों के कल्याण की कामना रहा। पूरे आयोजन के दौरान गोम्पा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और श्रद्धा के वातावरण से सराबोर दिखाई दिया।

बताया गया कि ये पावन पदचिह्न वर्ष 2000 में परम पावन 14वें दलाई लामा के कीह मोनेस्ट्री प्रवास के दौरान आयोजित महान कालचक्र समारोह की ऐतिहासिक धरोहर हैं। 9 अगस्त 2000 को विश्व शांति के उद्देश्य से आयोजित कालचक्र कार्यक्रम के दौरान बायोएनालॉजी के संस्थापक जीन-फिलिपिन ब्रेबियन ने कीह मोनेस्ट्री में दलाई लामा के चरण-कमलों के इन पवित्र पदचिह्नों को संरक्षित किया था।

करीब 26 वर्षों तक इस अमूल्य आध्यात्मिक धरोहर को सुरक्षित रखने के बाद जीन-फिलिपिन ब्रेबियन ने अपनी गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए जुलाई 2026 में इन्हें पुनः कीह मोनेस्ट्री को सादर समर्पित कर दिया। इसके बाद पहली बार श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ इन पावन पदचिह्नों का विशेष आयोजन किया गया।

कीह मोनेस्ट्री में आयोजित यह ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक समारोह श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय और सौभाग्यपूर्ण अवसर साबित हुआ। श्रद्धालुओं ने इसे केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि करुणा, शांति और मानवता के सार्वभौमिक संदेश से जुड़ा एक प्रेरणादायी क्षण बताया।

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