NHAI के निर्माण कार्यों पर स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा, गावर कंस्ट्रक्शन पर गंभीर आरोप

पुलों की गुणवत्ता, पहाड़ों की अवैज्ञानिक कटिंग, भूमि अधिग्रहण और स्थानीय लोगों से कथित दुर्व्यवहार को लेकर उठे सवाल; जैन जी के नेतृत्व वाले आंदोलन की चेतावनी 

सुभाष ठाकुर*******

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के तहत मंडी से पधर तक चल रहे राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय लोगों में लगातार रोष बढ़ता जा रहा है। निर्माण कार्यों से जुड़ी गावर कंस्ट्रक्शन कंपनी की कार्यप्रणाली, पुलों की गुणवत्ता, पहाड़ों की अवैज्ञानिक तरीके से हुई कटिंग, भूमि अधिग्रहण तथा स्थानीय लोगों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर अब गंभीर आरोप उठने के बाद भी केंद्रीय मंत्री मीटिंग गडकरी द्वारा NHAI के प्रोजेक्ट निर्देशक तथा उनके अधिकारियों को आम लोगों को परेशान करने को बेलगाम छोड़ दिया है ।

oplus_0

स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंडी से पधर तक राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान बनाए गए कई पुलों ,  ढंगों और अन्य संरचनाओं की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जांच करवाई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं।

लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में कहीं घटिया निर्माण, तकनीकी खामियां अथवा अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित ठेकेदारों और निगरानी अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं होती? स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग प्रोजेक्टों की निगरानी के लिए आधुनिक तकनीक और उपग्रह आधारित निगरानी की व्यवस्था होने के बावजूद जमीनी स्तर पर सामने आ रही समस्याओं पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती।

पहाड़ी कटिंग और मकानों को नुकसान पर भी सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के दौरान हिमाचल की संवेदनशील पहाड़ियों में कई स्थानों पर वैज्ञानिक एवं सुरक्षित तरीके से कटिंग नहीं की गई, जिसके कारण लोगों के मकानों, जमीनों और प्राकृतिक ढलानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

लोगों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के समय भी प्रभावित परिवारों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ा और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। प्रभावित लोगों की मांग है कि ऐसे मामलों की स्वतंत्र तकनीकी जांच करवाकर यह पता लगाया जाए कि पहाड़ी कटिंग और निर्माण कार्य निर्धारित पर्यावरणीय एवं इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।

NHAI अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने NHAI के संबंधित अधिकारियों और प्रोजेक्ट निदेशक की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि यदि निर्माण कार्यों की नियमित एवं प्रभावी निगरानी होती तो गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़ी शिकायतें इतनी गंभीर स्थिति तक नहीं पहुंचतीं।

लोगों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मांग की है कि मंडी-पधर राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण कार्यों का **स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट** करवाया जाए। साथ ही पुलों, डंगे, रिटेनिंग वॉल, पहाड़ी कटिंग तथा सड़क की गुणवत्ता की विशेषज्ञ टीम से जांच करवाई जाए।

स्थानीय लोगों से कथित दुर्व्यवहार का आरोप

स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि निर्माण कार्यों को लेकर सवाल उठाने वाले ग्रामीणों के साथ कंपनी से जुड़े कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है। कुछ लोगों ने निर्माण स्थल पर निजी सुरक्षा कर्मियों/बाउंसरों के व्यवहार को लेकर भी आपत्ति जताई है।

लोगों का कहना है कि किसी भी निजी कंपनी को स्थानीय नागरिकों के साथ दबाव या भय का माहौल बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यदि ऐसे आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन को इसकी निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री और प्रधानमंत्री से जवाबदेही तय करने की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं और इनकी गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना केंद्र सरकार तथा NHAI की जिम्मेदारी है। इसलिए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और NHAI के वरिष्ठ अधिकारियों को हिमाचल में चल रहे इन कार्यों की जमीनी स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए।

लोगों ने सवाल किया है कि यदि किसी निर्माण कंपनी के खिलाफ कहीं भी गंभीर शिकायतें या गुणवत्ता संबंधी आपत्तियां सामने आती हैं तो उसके बाद भी उसे लगातार बड़े प्रोजेक्टों में काम मिलने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। उन्होंने मांग की है कि सभी संबंधित टेंडरों और निर्माण कार्यों की प्रक्रिया की भी स्वतंत्र समीक्षा की जाए।

आंदोलन की जमीन तैयार होने लगी

स्थानीय लोगों में बढ़ते रोष को देखते हुए अब यह मामला आंदोलन का रूप लेने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि यदि NHAI और संबंधित निर्माण कंपनी ने शिकायतों का समाधान नहीं किया तथा निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई तो जैन जी के नेतृत्व में स्थानीय लोगों को आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध विकास या राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण के खिलाफ नहीं है, बल्कि सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह निर्माण कार्य के पक्ष में है। उनका कहना है कि जनता के पैसे से बनने वाली सड़क और पुलों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने केंद्र सरकार, NHAI और जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच करवाकर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *