सुभाष ठाकुर*******
मंडी के ऐतिहासिक सेरी मंच पर आयोजित जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। दूरदराज के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग देश के इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को देखने के लिए सेरी मंच पर पहुंचे हैं, लेकिन कार्यक्रम की बैठने और मंच व्यवस्था ऐसी रही कि सैकड़ों दर्शकों को कलाकारों का चेहरा देखने के बजाय उनकी पीठ ही दिखाई देती रही।
सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर रहे कलाकारों का रुख मुख्य अतिथि और मंच की ओर था, जबकि बड़ी संख्या में आम दर्शक सेरी मंच की सीढ़ियों पर बैठे हुए थे। ऐसे में स्वतंत्रता दिवस समारोह देखने पहुंचे लोगों को कलाकारों की प्रस्तुतियां आमने-सामने देखने का अवसर नहीं मिल पाया। यह स्थिति विशेष रूप से इसलिए खटकती है, क्योंकि सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल मंच पर बैठे विशिष्ट अतिथियों के लिए नहीं, बल्कि उन आम नागरिकों के लिए भी होते हैं जो दूरदराज से समारोह का हिस्सा बनने पहुंचते हैं।
मंच संचालन और कार्यक्रम प्रबंधन में इस प्रकार की व्यवस्था पर पहले से विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए था। मुख्य अतिथि के संबोधन और अन्य औपचारिक कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुछ ही मिनटों में मंच एवं बैठने की व्यवस्था में आवश्यक परिवर्तन किया जा सकता था। मुख्य अतिथि और अन्य अतिथियों के लिए सेरी मंच की सीढ़ियों अथवा किसी उपयुक्त स्थान पर विशेष व्यवस्था की जा सकती थी, ताकि कलाकारों का रुख आम दर्शकों की ओर हो और सेरी मंच पर मौजूद सैकड़ों लोग सांस्कृतिक कार्यक्रमों को आराम से और सीधे देख सकें।
जब सांस्कृतिक कार्यक्रम चला हुआ था उस वक्त सीढ़ियों पर बैठे हुए दर्शकों में आपसी चर्चा करते हुए सुनना गया कि नाचने वालों का मुंह सीढ़ियों की तरफ होना चाहिएं
जिला प्रशासन को भविष्य में इस प्रकार के बड़े आयोजनों की योजना बनाते समय दर्शकों की सुविधा को प्राथमिकता देनी चाहिए। पंचायत स्तर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले तक स्वतंत्रता दिवस समारोहों में ध्वजारोहण के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इसलिए जिला स्तरीय कार्यक्रमों में भी प्रत्येक जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए।
ऐसे बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की सफलता केवल मुख्य अतिथि, मंच और वीआईपी व्यवस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें विभिन्न विभागों, सामाजिक संगठनों, स्थानीय प्रतिनिधियों और कार्यक्रम प्रबंधन से जुड़े लोगों की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। सामूहिक योजना और जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे से ऐसी कमियों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विडंबना यह है कि कई बार पूरी व्यवस्था का ध्यान इस बात पर अधिक केंद्रित दिखाई देता है कि मंच पर मौजूद वीआईपी की तस्वीरें अच्छी आएं और उन्हें सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा सके। लेकिन किसी भी राष्ट्रीय कार्यक्रम की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब आम नागरिक भी स्वयं को उस आयोजन का सम्मानित और महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।
स्वतंत्रता दिवस केवल मंच पर बैठे कुछ विशेष लोगों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का उत्सव है। इसलिए भविष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की दिशा, मंच व्यवस्था और दर्शकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बेहतर योजना बनाई जानी चाहिए, ताकि सेरी मंच पर पहुंचा हर व्यक्ति कार्यक्रम को पूरे सम्मान और सहजता के साथ देख सके।
