*ब्लू बैरी होगी अब लाहौल के किसानों की नकदी फसल में शामिल, पहला प्रयास रहा सफल

उपायुक्त ने संभावना जताई कि आलू और सेब के बाद ब्लू बैरी से घाटी के किसान होगें अर्थिक रूप से सम्पन

अमर ज्वाला//केलांग

सितम्बर 20जनजातीय जिला लाहौल स्पीती की उपायुक्त किरण भड़ाना के सुझावनुसार बागवानी विभाग के सार्थक प्रयासों से लाहौल घाटी में ब्लू बैरी के उत्पादन की दिशा में एक नई पहल हुई है। बागवानी विभाग के उचित प्रशिक्षण और मार्गदर्शन और सहयोग से गौंधला के प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद ने 500 स्कवेयर मीटर के पोली हाउस में ब्लू बैरी के 500 पौधौं को सफलतापूर्वक उगाया है, जिनमें जल्द ही फल आने की पूरी संभावना है, उपायुक्त किरण भड़ाना ने आज इस ब्लू बैरी के अग्रिंम पक्ंित स्थल का विधिवत शुभारम्भ किया।

उपायुक्त ने गत वर्ष कार्यभार संभालते ही महिलाओं और घाटी के किसानों और बागवानों के लिए कार्य करने का संकल्प लिया था, उसी दिशा में यह एक अभिनव पहल है।

काबिलेगौर है उपायुक्त के विशेष आग्रह, मार्गदर्शन व सहयोग से बागवानी विभाग द्वारा केन्द्र सरकार की एकीकृत बागवानी मिशन योजना के तहत यह ब्लूबैरी का अग्रिंम पक्ंित स्थल तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इस अग्रिंम पक्ंित स्थल को तैयार करने पर लगभग 12 लाख 50 हजार का व्यय हुआ है और बागवानी विभाग द्वारा बागवान को इसके लिए 9 लाख 37 हजार 500 रूपये का अनुदान प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि बागवान द्वारा 500 स्क्वेयर मीटर के पालीहाउस में ब्लूबैरी के 500 पौधे उगाए गए हैं। उपायुक्त ने कहा कि यह एक कम भूमि पर अधिक पैदावार का उदाहरण भी है। उन्होंने क्षेत्र के अन्य लोगों से इस फल की बागवानी करने के लिए इस अग्रिंम पक्ंित स्थल का अवलोकन कर प्रेरित होने का आग्रह भी किया है। इसके लिए बागवानी विभाग बागवानों की पूरी मदद करेगा।

उन्होंने बताया कि ब्लूबेरी एक छोटा, नीले/बैंगनी रंग का मुलायम बेरी फल है जिसके घाटी में उत्पादन का पहला प्रयास गौंधला में सफल रहा है, कहा कि ब्लू बैरी की फसल को घाटी में बढ़ावा देने के लिए किसानों से सपर्क किया जाएगा और उन्हें यथासंभब सहायता भी की जाएगी ताकि वह ब्लू बैरी की उत्पादन की ओर कदम बढ़ाए। उन्होंने बताया कि भारत में इसे अभी भी प्रीमियम/एक्जॉटिक फल माना जाता है और सामान्य सेब, संतरा, केला आदि की तुलना में इसका बाजार मूल्य काफी अधिक रहता है।

उन्होंने कहा कि ब्लूबेरी बैक्सीनम प्रजाति का फल है। यह स्वाद में हल्का मीठा और खट्टापन लिए होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और विटामिन पाए जाते हैं, जिसके कारण शहरी उपभोक्ताओं में इसकी मांग बढ़ रही है और अगर घाटी के किसान इस फल की बागवानी करें तो आर्थिक रूप से काफी सम्पन हो सकते हैं।

उप निदेशक बागवानी मीनाक्षी शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि ब्लू बैरी की खेती सामान्य फलदार पौधों से थोड़ी अलग है। इसे अम्लीय मिट्टी/ग्रो-बैग, नियंत्रित सिंचाई और सही किस्म की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अन्य जिलों में भी अपेक्षाकृत गर्म क्षेत्रों पालमपुर/कांगड़ा, मंडी, कुल्लू में भी ब्लू बैरी उगाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अभी देश में इसका उत्पादन अपेक्षाकृत कम है, लेकिन कई राज्यों में तेजी से प्रयोग और व्यावसायिक खेती बढ़ रही है, कश्मीर में भी इसकी व्यावसायिक संभावनाओं पर काम हो रहा है और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश में ब्लूबेरी की संभावनाएं अच्छी मानी जा रही हैैं। उन्होंने कहा कि अगर घाटी के किसान बागवान ब्लू बैरी फल की बागवानी की दिशा में कदम बढ़ाए तो भविष्य में आमदनी की बेहतर संभाबनाए हैं।

इस मौके पर प्रगतिशील बागवान प्रताप चंद ने उपायुक्त को अपने पालीहाउस में उगाई गई ब्लू बैरी के पौधौं के बारे में पूर्ण जानकारी प्रदान की।

इस अवसर पर उपस्थित किसानों व बागवानों ने घाटी में कृषि और बागवानी क्षेत्र में आ रही समस्याओं के बारे में बताया, जिस पर उपायुक्त में यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया।

इस मौके पर बागवानी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी और क्षेत्र के किसान व बागवान उपस्थित रहे।

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