आईआईटी की आधिकारिक सामग्री में एमबीसीसी-2025 का विशेष भोजन प्रायोजक बताया, उसके संस्थान तक पहुंचने की प्रक्रिया क्या थी? पहली खबर में उठे सवालों के बीच आईआईटी के प्रशस्ति-पत्र और 18 सितंबर के प्रेस नोट भी जांच के केंद्र में
सुभाष ठाकुर*******
क्रिप्टो निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में अमर ज्वाला द्वारा उठाए गए सवालों के बाद आईआईटी मंडी की ओर से 18 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण ने संस्थान की भूमिका को लेकर अपना पक्ष रखा है। आईआईटी मंडी ने कहा है कि कथित निवेश गतिविधियां संस्थान की किसी आधिकारिक गतिविधि का हिस्सा नहीं थीं और संस्थान ने किसी व्यक्ति को धन जुटाने अथवा निवेश के लिए अधिकृत नहीं किया था।
लेकिन आईआईटी के इस स्पष्टीकरण के बाद मामला समाप्त होने के बजाय अब उपलब्ध संस्थागत दस्तावेजों की एक दूसरी कड़ी सामने आ रही है। सवाल यह नहीं है कि आईआईटी मंडी ने किसी निजी व्यक्ति को निवेश की अनुमति दी थी या नहीं। असली सवाल यह है कि जिस व्यक्ति और उससे जुड़े कारोबारी संपर्कों का उल्लेख इस मामले में सामने आया है, उनकी आईआईटी तक पहुंच किस स्तर पर बनी और संस्थान से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भूमिका किस प्रक्रिया के तहत तय हुई?
एमबीसीसी-2025 में सेराफिना का आधिकारिक प्रायोजन
आईआईटी मंडी की अपनी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 4 से 7 जून 2025 तक आयोजित माइंड, ब्रेन एंड कॉन्शसनेस सम्मेलन यानी एमबीसीसी-2025 में भोजन और जलपान की व्यवस्था सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट द्वारा प्रायोजित की गई थी और उसे सम्मेलन का विशेष भोजन प्रायोजक बताया गया था। सम्मेलन आईआईटी मंडी के परिसर में आयोजित हुआ था।
आईआईटी की एमबीसीसी-2025 की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ‘पार्टनर्स एंड स्पॉन्सर्स’ के लिए अलग व्यवस्था दर्ज है। सम्मेलन का आयोजन आईआईटी मंडी के भारतीय ज्ञान प्रणाली एवं मानसिक स्वास्थ्य अनुप्रयोग केंद्र से जुड़ा था।
यह तथ्य अपने आप में किसी निवेश अपराध अथवा किसी व्यक्ति की भूमिका साबित नहीं करता। लेकिन वर्तमान विवाद की पृष्ठभूमि में यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि सेराफिना को प्रायोजक बनाने की प्रक्रिया क्या थी, संपर्क किसने स्थापित किया और प्रायोजन स्वीकार करने से पहले संस्थान ने क्या सत्यापन किया।
आईआईटी का नया स्पष्टीकरण क्या कहता है ?
18 सितंबर के अपने स्पष्टीकरण में आईआईटी मंडी ने कथित निवेश गतिविधियों से संस्थान को अलग बताया है। संस्थान के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने स्टार्टअप स्थापित करने और संस्थान से सहायता लेने की इच्छा जताते हुए संपर्क किया था तथा ऐसे उद्यमियों को सामान्य प्रोत्साहन और मार्गदर्शन दिया जाता है।
आईआईटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस तरह का सामान्य प्रोत्साहन किसी व्यक्ति अथवा उसके निजी कारोबारी कार्य की स्वीकृति, प्रायोजन या संरक्षण नहीं माना जा सकता।
संस्थान के अनुसार उसने कथित निवेश गतिविधियों से संबंधित कोई धन प्राप्त, प्रबंधित, गारंटी अथवा हस्तांतरित नहीं किया और न ही किसी व्यक्ति को निवेश के लिए धन जुटाने की अनुमति दी।
लेकिन वहीं आईआईटी निर्देशक लक्ष्मीधर बेहरा द्वारा सार्वजनिक मंच से माईक द्वारा घोषणा कर सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट कम्पनी में इन्वेस्ट करने से एक साल में सो प्रतिशत मुनाफा होगा । तो फिर आईआईटी द्वारा प्रेस नोट में इसका जिक्र क्यों नहीं किया गया ? जिसका वीडियो आईआईटी परिसर के भीतर बना कर कई महीनों बाद जारी किया गया।
यही स्पष्टीकरण अब एक और सवाल पैदा करता है यदि निवेश गतिविधि संस्थान की आधिकारिक गतिविधि नहीं थी, तो संबंधित व्यक्ति की संस्थान से जुड़ी गतिविधियों और संपर्कों की प्रकृति क्या थी और अलग-अलग मौकों पर संस्थान से मिलने वाली औपचारिक पहचान या सहभागिता का आधार क्या था?
प्रशस्ति-पत्रों का मूल उद्देश्य भी जांच का हिस्सा

अमर ज्वाला की पहली खबर के बाद सामने आए आईआईटी मंडी द्वारा जारी प्रशस्ति-पत्रों को भी इसी संदर्भ में देखना जरूरी है। इन प्रमाणपत्रों का अस्तित्व यह साबित नहीं करता कि आईआईटी ने किसी निवेश योजना को मंजूरी दी थी। लेकिन अब महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि इन प्रशस्ति-पत्रों का मूल उद्देश्य क्या था, इन्हें किस कार्यक्रम अथवा योगदान के लिए जारी किया गया, किस अधिकारी ने जारी किया और प्रमाणपत्र पाने वाले व्यक्ति अथवा कंपनी की आईआईटी से संस्थागत संपर्क की प्रकृति क्या थी।
यानी दस्तावेजों को अलग-अलग देखने के बजाय उनकी पूरी कड़ी देखनी होगी पहले संपर्क, स्टार्टअप संबंधी मार्गदर्शन, संस्थान से जुड़ी गतिविधियां, संबंधित कार्यक्रम, प्रशस्ति-पत्र, सेराफिना का सम्मेलन प्रायोजन और उसके बाद सामने आई कथित निवेश गतिविधियां।
इनमें से कोई एक दस्तावेज अकेले आपराधिक भूमिका सिद्ध नहीं करता। लेकिन जांच एजेंसी के लिए ये सभी दस्तावेज संपर्कों की समयरेखा और प्रकृति समझने में उपयोगी हो सकते हैं।
निवेश कार्यक्रम आईआईटी परिसर तक कैसे पहुंचा?

अमर ज्वाला की पहली खबर का मूल सवाल भी यही था कि निजी निवेश से जुड़ा कार्यक्रम आईआईटी मंडी के परिसर अथवा उसके आसपास किस माध्यम से पहुंचा और उसमें संस्थान के अधिकारियों की उपस्थिति किस हैसियत से थी।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में आईआईटी मंडी के निदेशक की एक कार्यक्रम में उपस्थिति और संबोधन को लेकर भी सवाल उठे हैं। वीडियो की वास्तविक तारीख, कार्यक्रम की अनुमति, आयोजनकर्ता और उसमें कही गई बातों की पूरी पृष्ठभूमि संबंधित मूल रिकॉर्ड से ही स्थापित की जानी चाहिए।
इसलिए जांच का सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं, बल्कि यह पता लगाना है कि **कार्यक्रम किसने आयोजित किया, किसने अनुमति दी, किस उद्देश्य से आयोजित हुआ और वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की आधिकारिक अथवा निजी भूमिका क्या थी।
यही नहीं सेराफिना वक्त मैनेजमेंट कम्पनी संचालक के साथ वीडियो कॉल करते हुए अनिल धोते ने यह स्पष्ट तौर पर कहा है कि आपने मुझे यहां लाया हुआ है मैं आपकी इजत…..
अब जांच के केंद्र में पांच सवाल
पहला सेराफिना वेल्थ मैनेजमेंट को एमबीसीसी-2025 का विशेष भोजन प्रायोजक किस प्रक्रिया के तहत बनाया गया?
दूसरा प्रायोजन स्वीकार करने से पहले कंपनी और उसके प्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि का क्या सत्यापन किया गया?
तीसरा संबंधित व्यक्ति का आईआईटी मंडी से पहला संपर्क कब, किस माध्यम से और किस उद्देश्य से हुआ?
चौथा आईआईटी से जारी प्रशस्ति-पत्र किस मूल उद्देश्य और किस गतिविधि अथवा योगदान के लिए जारी किए गए थे?
पांचवां आईआईटी परिसर अथवा उससे जुड़े कार्यक्रम में निवेश संबंधी प्रस्तुति या गतिविधि आयोजित करने की अनुमति किसने दी और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड क्या है ?
