माइंडफुल लर्निंग से विद्यार्थियों में विकसित होगी सजग सोच और भावनात्मक संतुलन : प्रो. ललित अवस्थी

सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी में तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू, कुलपति ने कहा—शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं

अमर ज्वाला//मंडी

सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी एवं आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में तीन दिवसीय ‘माइंडफुल लर्निंग’ कार्यशाला का सोमवार को शुभारंभ हुआ। 28 से 30 सितंबर तक आयोजित होने वाली इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों में सजगता, आत्म-जागरूकता, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य तथा सीखने के प्रति सकारात्मक और संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना है।

कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा परिणाम और शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थियों में स्पष्ट सोच, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन, धैर्य, लचीलापन और जीवन के प्रति उद्देश्यपूर्ण दृष्टिकोण विकसित करना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।

उन्होंने कहा कि माइंडफुल लर्निंग विद्यार्थियों को वर्तमान क्षण के प्रति सजग रहने, तनाव और चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना करने तथा अधिक एकाग्रता और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सहायता कर सकती है। विश्वविद्यालय जीवन में विद्यार्थियों को परीक्षा, करियर, रोजगार, पारिवारिक अपेक्षाओं और सामाजिक दबाव जैसी अनेक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य के साथ शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

प्रो. अवस्थी ने विद्यार्थियों को शिक्षकों, मेंटरों, मित्रों और परिवार के साथ संवाद बनाए रखने तथा आवश्यकता पड़ने पर सहायता लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि हर समय ठीक महसूस न करना भी सामान्य है और सहायता मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का प्रतीक है।

शहीद भगत सिंह की जयंती का उल्लेख करते हुए कुलपति ने विद्यार्थियों से व्यापक अध्ययन करने, प्रश्न पूछने तथा तर्क और प्रमाण के आधार पर अपनी समझ विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल परीक्षाओं की तैयारी का स्थान नहीं, बल्कि सोचने और स्वयं की समझ विकसित करने का संस्थान भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं को अपनी पहचान या भविष्य का निर्धारक नहीं बनाने की सलाह दी। साथ ही पर्याप्त नींद, शारीरिक गतिविधियों, अच्छे संबंधों, रुचियों तथा मोबाइल और सामाजिक माध्यमों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया।

कुलपति ने विश्वविद्यालय की मेंटर-मेंटी व्यवस्था को विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण सहयोग तंत्र बताते हुए कहा कि विद्यार्थी शैक्षणिक एवं करियर संबंधी समस्याओं के साथ-साथ तनाव, अकेलेपन अथवा अन्य व्यक्तिगत कठिनाइयों की स्थिति में भी अपने मेंटर से संपर्क कर सकते हैं।

इस अवसर पर अकादमिक मामलों के डीन डॉ. पवन चंद ने माइंडफुल लर्निंग को एकाग्रता और आत्म-जागरूकता के लिए उपयोगी बताया। प्रो. राजेश कुमार ने समग्र शिक्षा एवं व्यक्तित्व विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथि वक्ता मोहन वालिया ने माइंडफुल लर्निंग के व्यावहारिक पहलुओं पर विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।

कार्यशाला की समन्वयक डॉ. नीलम ठाकुर ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया तथा कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी दी। डॉ. अक्षय कुमार ने विद्यार्थियों के लिए माइंडफुलनेस की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। डॉ. राकेश शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

कार्यशाला के आगामी सत्रों में माइंडफुलनेस, एकाग्रता, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक स्वास्थ्य तथा सीखने के सजग एवं प्रभावी तरीकों से संबंधित गतिविधियां और संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी डीन, शिक्षकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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