हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं को मिले नए आयाम
अमर ज्वाला//शिमला
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश के छह सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में पीजी मेडिकल सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 कर ऐतिहासिक वृद्धि की है। पीजी मेडिकल सीटों में इस तरह 320 सीटों की वृद्धि की गई है। इसे एनएमसी ने अनुमोदित किया है। पिछले 40 वर्षों में पीजी मेडिकल सीटों में की गई यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि यह विस्तार विशेषज्ञ चिकित्सकों के प्रशिक्षण को मजबूत करने, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य के चिकित्सा क्षेत्र के परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। प्रदेश सरकार सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों को सुदृढ़ करने, स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा के अवसरों को विस्तार प्रदान करने और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार लाने पर विशेष बल दे रही है।
उन्होंने कहा कि इस विस्तार के तहत इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (आईजीएमसी), शिमला में पीजी सीटों की संख्या में 91 सीटों की वृद्धि कर इन्हें 139 से बढ़ाकर 230 किया गया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में सीटों की संख्या 99 से बढ़ाकर 156 की गई है। इस संस्थान में 57 सीटों की वृद्धि की गई है। श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मंडी में सीटें 24 से बढ़ाकर 79 की गई हैं, यानि 55 सीटों की वृद्धि हुई है। डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नाहन में पीजी सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि करते हुए इन्हें 3 से बढ़ाकर 35 किया गया है। इस संस्थान में 32 सीटों की वृद्धि की गई है। पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चंबा में सीटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 32 की गई है, यहां 28 सीटों की वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में पीजी सीटें 8 से बढ़ाकर 65 की गई हैं। इस संस्थान में 57 सीटों की वृद्धि की गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पीजी मेडिकल सीटों में इस वृद्धि से युवा चिकित्सकों को प्रदेश के भीतर ही विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे और सरकारी अस्पतालों में प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लोगों को घरद्वार के निकट विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस कदम से लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं मिलेगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय में सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञों के 218 पद सृजित किए हैं। इनमें डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में 54 पद, डॉ. यशवंत सिंह परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नाहन में 31 पद, पंडित जवाहर लाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, चंबा में 32 पद, श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, मंडी में 36 पद, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में 63 पद तथा अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी, चमियाणा में दो पद शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी संचालन के लिए आवश्यक विशेषज्ञ कार्यबल को मजबूत करने की दिशा में पीजी मेडिकल सीटों के विस्तार के साथ इन 218 पदों का सृजन प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रहा है। इन अतिरिक्त पदों से स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रशिक्षण को बढ़ावा मिलेगा, चिकित्सकीय सेवाओं में सुधार होगा और प्रदेशभर में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और विशेषज्ञ चिकित्सकों के पदों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है, ताकि प्रदेश की जनता की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि पीजी सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करना तथा सीनियर रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञों के 218 पद सृजित करना संस्थागत सुदृढ़ीकरण और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के प्रति वर्तमान सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का विस्तार और विशेषज्ञ पदों का सृजन एक मजबूत चिकित्सा कार्यबल विकसित करने तथा सरकारी अस्पतालों में उन्नत उपचार उपलब्ध करवाने की क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से मरीजों को अपने घरद्वार के निकट ही बेहतर उपचार की सुविधाएं मिलेगी और उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाने की निर्भरता भी खत्म होगी।
