सुभाष ठाकुर*******
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने हाइड्रो प्रोजेक्टों से राज्य को मिलने वाली रॉयल्टी की लड़ाई लड़ी हुई है वैसे ही एक और कदम लीज डीड के मामले में न्यायालय का रुख करना जरूरी है। रॉयल्टी की लड़ाई एक ऐतिहासिक लड़ाई में जीत हुई जिसका श्रेय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को जाता है । जिसका परिणाम अब हिमाचल प्रदेश के पक्ष में आया है। अन्य हाइड्रो परियोजनाओं पर भी यही आदेश लागू माना जा सकता है।
हाइड्रो प्रोजेक्टों के मालिकों के साथ 1995 में हुए एमओयू के अनुसार, उन्हें लीज डीड की शर्तों के अनुसार पैसा जमा करना था। लेकिन कई वर्षों से कई बड़े प्रोजेक्ट बिजली बनाने के बावजूद, परियोजना मालिकों ने लीज डीड नहीं बनाई और राज्य सरकार ने भी कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की। जबकि प्रदेश में सभी छोटे प्रोजेक्ट लीज डीड बना चुके हैं और शर्तों के अनुसार पैसा भी जमा करवा रहे हैं। जब परियोजना मालिक और राज्य सरकार के साथ MOU हस्ताक्षर हुए हैं उस दौरान की शर्तों के अनुसार लीज डीड की राशि मार्केट कीमत का 18 प्रतिशत प्रति बीघा की शर्त थी, जिसे 2011 में सालाना 3 प्रतिशत कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने व्यक्तिगत पहल करते हुए राज्य के महाधिवक्ता अनूप रतन को सर्वोच्च न्यायालय में जाने के लिए पूरा सहयोग किया। उन्होंने समझा कि हिमाचल प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए यह लड़ाई लड़नी जरूरी है। जबकि राज्य की पूर्व की सरकारों के दौरान वन विभाग के आलाधिकारियों से लेकर धरातल तक परियोजना खेल में रंगीन ऐसे रहे कि हरे भरे जंगलों को तबाह करने में भी शामिल रहे। जिस ओरियोजना में हरे भरे पेड़ों के जंगल में हजारों पेड़ परियोजना निर्माण की जद्द में आए वहां दर्जनों पेस दर्शा कर लाखों रुपए डकारते भी रहे जिसका खुलासा भी किया गया है। यही नहीं राजस्व अधिकारियों ने भी ऐसा ही किया हुआ है। कई हैक्टर वन भूमि को बीघा के कागजात बना कर सभी ने परियोजना का खेल खेला हुआ है।
यही नहीं वन भूमि पर बगीचे तक लगा दिए जिस बन भूमि को परियोजना निर्माण के लिए सरकार से किया हुआ है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद, हिमाचल प्रदेश को हाइड्रो प्रोजेक्टों से 18 प्रतिशत रॉयल्टी मिलेगी, जो राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए एक बड़ा संजीवनी साबित होगी। साथ ही, परियोजना मालिकों को लीज डीड की शर्तों के अनुसार पैसा जमा करवाने का एक अलग कदम उठाना होगा।
इस निर्णय का असर आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। राज्य सरकार को हाइड्रो प्रोजेक्टों से अधिक राजस्व मिलेगा, जिससे राज्य की विकास योजनाओं को गति मिलेगी और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का आत्मनिर्भर हिमाचल का वादा पूरा करने में कारगार साबित होगा।
