नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की दयनीय स्थिति

अमर ज्वाला//मंडी

नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजी विभाग की स्थिति बहुत खराब है। विभाग में स्टाफ की भारी कमी है, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। वर्तमान में विभाग में केवल एक डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि विभाग में कुल आठ पद स्वीकृत हैं।

मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीके वर्मा ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी के कारण सेवाएं पूरी तरह प्रभावित हो गई हैं। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। सामान्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड की तारीखें दो से तीन महीने बाद की दी जा रही हैं।

मरीजों को मजबूरन निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है, जिससे उनके आर्थिक बोझ में वृद्धि हो रही है। विभाग के एचओडी डॉ. सौरभ ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी के कारण समस्याएं आ रही हैं।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में मेडिकल कॉलेज के दौरे के दौरान एमआरआई सुविधा जल्द शुरू करने की घोषणा की थी। इसके लिए 28 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसके अलावा, मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने की भी योजना है, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकें।

सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। हाल ही में 53 नए डॉक्टरों की तैनाती की गई है, जिसमें से कुछ मेडिकल कॉलेजों में तैनात किए गए हैं। इसके अलावा, 600 नर्सों की तैनाती भी की गई है। सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मशीनें और उपकरण लगाने के लिए भी धन स्वीकृत किया है।

मरीजों को अभी भी कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की सेवाएं प्रभावित होने से मरीजों को मजबूरन निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है। इसके अलावा, मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें बेहतर उपचार से वंचित रहना पड़ रहा है।

सरकार की पहल और मेडिकल कॉलेज प्रशासन के प्रयासों से उम्मीद है कि जल्द ही मरीजों को बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी। रेडियोलॉजी विभाग में स्टाफ की कमी को दूर करने और आधुनिक मशीनें लगाने से मरीजों को राहत मिलेगी। इसके अलावा, रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से मरीजों को और भी बेहतर उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।

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