चौहार घाटी में ग्रामीणों के लिए रोजगार का साधन बना लिंगड़, जंगलों से जुटाकर कर रहे बिक्री

सुभाष ठाकुर*******

चौहार घाटी की शिल्हबुधानी पंचायत में इन दिनों ग्रामीण महिलाएं और लोग जंगलों से लिंगड़ इकट्ठा कर रहे हैं और व्यापारी गांव में पहुंच कर आजकल 15 खरीद रहे हैं ग्रामीणों के लिए यह रोजगार प्राकृतिक देन दी हुई है । ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं बच्चे और पुरुष लिंगड़  इक्कठा कर गठियाँ तैयार करने में जुटे हुए हैं। ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों में जाकर प्राकृतिक रूप से उगने वाले लिंगड़ को एकत्रित करते हैं और फिर उसे बाजार तथा व्यापारियों को बिक्री के लिए तैयार करते हैं। यह दृश्य चौहार घाटी की शिल्हबुधानी पंचायत का का है ।

लिंगड़ एक बेहद पौष्टिक और 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक हरी सब्जी मानी जाती है। इसका उपयोग सब्जी के साथ-साथ स्वादिष्ट अचार बनाने में भी किया जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों के जंगलों में पैदावार होने वाली यह प्राकृतिक हर्बल लिंगड की सब्जी इसकी काफी मांग शहरों में रहती है, और लोग इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि जंगलों से मिलने वाला यह प्राकृतिक उत्पाद उनके लिए रोजगार और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन बन गया है। खासकर महिलाओं को इससे घर के पास ही काम मिल जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिल रही है।

चौहार घाटी के ग्रामीण क्षेत्रों में लिंगड़ केवल पारंपरिक खाद्य पदार्थ ही नहीं बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका का भी अहम हिस्सा बन चुका है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि ऐसे प्राकृतिक और ऑर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए उचित बाजार और सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर लाभ मिल सके।

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