13 साल बाद फर्जी डिग्री पर कार्रवाई, लेकिन सरदार पटेल विश्वविद्यालय भर्ती प्रकरण अब भी ठंडे बस्ते में

सुभाष ठाकुर*******

मंडी। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में फर्जी पीएचडी डिग्री के आधार पर नियुक्त सहायक प्रोफेसर की 13 वर्ष बाद सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद हिमाचल प्रदेश के सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मंडी की विवादित भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

साप्ताहिक अमर ज्वाला ने वर्ष 2023 में दस्तावेजों के आधार पर विश्वविद्यालय में शिक्षकों एवं गैर-शिक्षकों की नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं, फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों और चयन प्रक्रिया में गंभीर सवाल उठाए थे। इसके बाद तत्कालीन विपक्ष में रही कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया और विधानसभा के भीतर भी मामला गूंजा।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच भी करवाई गई और लगभग 800 पृष्ठों की जांच रिपोर्ट तैयार की गई। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अब तक किसी कार्रवाई की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

 

इस मामले को उजागर करने में आरटीआई कार्यकर्ता विपिन गुलेरिया की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने विभिन्न दस्तावेज और सूचनाएं सामने लाकर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला चर्चा का विषय बना रहा। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस के नेताओं और विधायकों ने इसे बड़े भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन अब, जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, तो इस मामले पर अपेक्षित कार्रवाई न होने से कई सवाल उठ रहे हैं। जिस विधायक ने कभी इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था, वह भी अब इस विषय पर सार्वजनिक रूप से मुखर दिखाई नहीं दे रहे हैं।

चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज प्रकरण में वर्षों बाद भी कार्रवाई होना यह दर्शाता है कि यदि संस्थागत इच्छाशक्ति हो तो पुराने मामलों में भी निर्णय संभव है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि सरदार पटेल विश्वविद्यालय भर्ती मामले में जांच पूरी हो चुकी है, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कब होगी? प्रदेश की जनता और योग्य अभ्यर्थी इस प्रश्न का उत्तर जानना चाहते हैं।

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