डॉ. भीमराव आंबेडकर की आधुनिक भारत की परिकल्पना: एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी

डॉ. भीमराव आंबेडकर की आधुनिक भारत की परिकल्पना: एक विचारोत्तेजक संगोष्ठी

अमर ज्वाला //बंजार

वल्लभ राजकीय महाविद्यालय, मंडी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभागाध्यक्ष फ्लाइंग ऑफिसर डॉ. चमन लाल क्रांति सिंह ने राजकीय महाविद्यालय, बंजार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में “भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की आधुनिक एवं अखंड भारत की परिकल्पना: आधुनिकीकरण, सामाजिक रूपांतरण और मीडिया विमर्श में उभरती चुनौतियाँ” विषय पर एक अत्यंत विचारोत्तेजक एवं शोधपरक पत्र का ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण किया।

डॉ. चमन ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर आधुनिक एवं अखंड भारत के सर्वोच्च शिल्पकार थे। उन्होंने मेलों के माध्यम से भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. आंबेडकर ने भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना, दामोदर वैली परियोजना, श्रम कानूनों के निर्माण, महिलाओं के अधिकारों की स्थापना, शैक्षिक सुधारों, संविधान निर्माण और भारत में बौद्ध धम्म के पुनर्जागरण में ऐतिहासिक योगदान दिया।

डॉ. चमन ने कहा कि डॉ. आंबेडकर का चिंतन आज भी समावेशी विकास, लोकतांत्रिक शासन और सामाजिक न्याय के लिए पथप्रदर्शक है। उन्होंने कहा कि डॉ. आंबेडकर ने सामाजिक लोकतंत्र को राजनीतिक लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त माना और स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व को लोकतांत्रिक जीवन का आधार बताया।

डॉ. चमन ने रेखांकित किया कि डॉ. आंबेडकर केवल भारतीय संविधान के शिल्पकार ही नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी विधिवेत्ता, प्रखर अर्थशास्त्री, महान सामाजिक दार्शनिक और मानवतावादी चिंतक भी थे। उनकी आधुनिक भारत की परिकल्पना राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित न होकर सामाजिक न्याय, संवैधानिक नैतिकता, आर्थिक लोकतंत्र, लैंगिक समानता और मानवीय गरिमा जैसे मूलभूत मूल्यों पर आधारित थी।

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