रात में निपटाने की बात करने वाले उपमुख्यमंत्री HRTC की खटारा बसों से निपट नहीं पा रहे, ग्रामीण जनता बेहाल

प्रदेश सरकार के तीन वर्ष पूरे होने पर मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित संकल्प कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंच से यह बयान दिया कि यदि प्रदेश सरकार के अधिकारी रात के अंधेरे में बीजेपी नेताओं से मिलते हैं तो “रात को ही निपटा दिए जाएंगे।” लेकिन विडंबना यह है कि जिन उपमुख्यमंत्री के पास हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) की जिम्मेदारी है, वे स्वयं ग्रामीण जनता की दिन-रात की पीड़ा को न तो देख पा रहे हैं और न ही उसका संज्ञान ले पा रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में HRTC की खटारा बसों ने जनता की मुश्किलों को कई गुना बढ़ा दिया है। जगह-जगह सड़कों के किनारे HRTC की बसें खराब हालत में खड़ी दिखाई दे रही हैं, जिनके पहिए जाम हो चुके हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण जनता पर पड़ रहा है, जिसे कई-कई किलोमीटर पैदल चलने या फिर महंगी प्राइवेट टैक्सियों का सहारा लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

प्रदेश सरकार का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है, लेकिन HRTC की स्थिति पूरी तरह से चरमरा चुकी है। मंडी जिले की दुर्गम चौहार घाटी इसका बड़ा उदाहरण है। चौहार घाटी की बल्ह रोपा सड़क पर HRTC की बसें न के बराबर रह गई हैं। बल्ह पुल के पास कई दिनों से एक HRTC बस खराब हालत में खड़ी है, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

इस स्थिति में घाटी की जनता को मजबूरी में निजी बसों में महंगे किराए देकर सफर करना पड़ रहा है। महिलाओं को HRTC बसों में मिलने वाली 50 प्रतिशत किराया रियायत भी नहीं मिल पा रही है, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। हालात ऐसे हैं मानो प्रदेश सरकार जनता को जानबूझकर निजी बस ऑपरेटरों के रहमोकरम पर छोड़ रही हो।

चौहार घाटी के लिए जोगिंदरनगर से बरोट, म्योट और थलट्टूखोड़ जाने वाली HRTC बस को पिछले दो वर्षों से बंद रखा गया है। इसके चलते घाटी के हजारों लोगों को सुबह के समय जोगिंदरनगर और पधर पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, घाटी के कई अन्य रूट भी बंद कर निजी बसों को सौंप दिए गए हैं।

निजी बस ऑपरेटर अपनी मनमर्जी से बसें चलाते हैं। कई बार शादियों की बुकिंग के चलते वे दो-दो दिन तक अपने निर्धारित रूट छोड़ देते हैं, जिससे आम जनता का सफर न केवल बाधित होता है बल्कि कई गुना महंगा भी हो जाता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब उपमुख्यमंत्री मंच से सख्त बयान दे सकते हैं, तो HRTC की बदहाल व्यवस्था और ग्रामीण जनता की पीड़ा पर चुप्पी क्यों? प्रदेश की जनता अब केवल बयानों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर सुधार की उम्मीद कर रही है।

यह जानकारी बार बार एचआरटीसी के अधिकारियों के देने बाद भी आम जनता के लिए कोई सुनवाई होती है । क्योंकि एचआरटीसी के सभी अधिकारियों को मालूम है कि उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बयान दिया है जो बीजेपी नेताओं से रात के अंधेरे में मिलेंगे उन्हें ही रात के अंधेरे में निपटा देंगे।

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