सुभाष ठाकुर*******
सत्ता के नशे में चूर हुए सियासतकार इस कदर स्वार्थी और अभिमानी हो चुके है कि सत्ता की गद्दी पर बैठते पल भर में अपने असली रूप को दिखाने में देरी नहीं लगाते।
अंतरराष्ट्रीय मंडी शिवरात्रि की व्यवस्था में व्यस्त मंडी के उपायुक्त अपूर्व देवगण देर रात तक अधिकारियों तथा अन्य संगठनों के साथ विभिन्न मीटिंगों में व्यवस्त भी हो सकते हैं । लेकिन मंत्री का विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में विशेषाधिकार हनन में अपने प्रोटोकॉल को कांग्रेस नेताओं के दर्द का हथियार बना डाला है।
हिमाचल सरकार और कांग्रेस संगठन में आपसी समन्वय की कमी मंत्री के विशेषाधिकार हनन वाले पत्र की सियासत खुलकर सामने उभर चुकी है।
आज दिनभर सोशल मीडिया में मंत्री द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को लिखा हुआ विशेषाधिकार हनन को लेकर पत्र खूब वायरल हुआ है। मंत्री ने भले ही अपने संवैधानिक पद के प्रोटोकॉल नियमानुसार पत्र लिखा हो, लेकिन जनता मंडी जिला उपायुक्त के पक्ष में खुलकर आ चुकी है। सियासत की गद्दी में जब-जब नेता तानाशाह बन बैठते हैं, वक्त आने पर जनता उन्हें उनकी असली प्रोटोकॉल जरूर दिखा देती है। अब देखना यह है कि इस मामले में आगे क्या होता है!


हिमाचल प्रदेश सरकार के आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल तथा विधि मंत्री यादविंदर गोमा ने मंडी के उपायुक्त (डीसी) अपूर्व देवगन, IAS के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन (Notice of Privilege) का नोटिस भेजा है। यह नोटिस गणतंत्र दिवस समारोह से एक दिन पहले मंत्री के मंडी आगमन के दौरान डीसी की उपस्थित नहीं होने पर सरकारी प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर दिया गया है।
मंत्री यादविंदर गोमा ने अपने पत्र में कहा है कि वह 25 जनवरी 2026 को 26 जनवरी को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के लिए मंडी पहुंचे थे, लेकिन उनके आगमन के समय उपायुक्त मंडी उपलब्ध नहीं थे और न ही किसी प्रकार की पूर्व सूचना या समन्वय किया गया।

मंत्री ने आरोप लगाया है कि—
राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम से पहले एक कैबिनेट मंत्री के आगमन के बावजूद उपायुक्त द्वारा कोई संचार नहीं किया गया। उपायुक्त स्वयं मंत्री के आगमन पर मौजूद नहीं थे, जो प्रशासनिक गैर-जिम्मेदारी और तैयारी की कमी को दर्शाता है।
यह आचरण स्थापित सरकारी प्रोटोकॉल और प्रशासनिक नियमों का स्पष्ट उल्लंघन बताया गया है।
इस लापरवाही से एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि द्वारा धारण किए गए संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है और यह विधायिका के प्रति असम्मान को दर्शाता है।
मंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की है कि—
इस पत्र को औपचारिक रूप से विशेषाधिकार हनन नोटिस के रूप में स्वीकार किया जाए।
उपायुक्त मंडी से इस मामले में स्पष्टीकरण तलब किया जाए।
भविष्य में संवैधानिक पदों और सरकारी प्रोटोकॉल के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए उचित निर्देश जारी किए जाएं।
यह नोटिस हिमाचल प्रदेश विधानसभा की प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमावली के नियम 75 (अध्याय-XII) के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है।
