केंद्र सरकार कर रही हिमाचल को कमजोर , मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नहीं रुका प्रदेश का विकास: जगदीश रेड्डी

एनडीए सरकार पर हिमाचल को कमजोर करने का आरोप, लेकिन मुख्यमंत्री के नेतृत्व में नहीं रुका विकास: जगदीश रेड्डी

अमर ज्वाला//मंडी

सिराज विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जगदीश रेड्डी ने केंद्र की एनडीए सरकार पर हिमाचल प्रदेश की चुनी हुई सरकार को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लगातार प्रयास करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि Revenue Deficit Grant (RDG) को रोकना राज्य सरकार पर दबाव बनाने और विकास की गति को बाधित करने की एक सोची-समझी रणनीति है।

 

हालांकि, इसके साथ ही जगदीश रेड्डी ने मुख्यमंत्री के नेतृत्व की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार और बीजेपी द्वारा अपनाए जा रहे तमाम हथकंडों के बावजूद राज्य सरकार ने प्रदेश की जनता की समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी।

उन्होंने कहा कि हालिया वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने भीषण प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार ने आपदा राहत, पुनर्वास, सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा और जनकल्याणकारी योजनाओं को प्राथमिकता देते हुए मजबूती से काम किया।

जगदीश रेड्डी ने कहा, कि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर को चाहिए था कि वह प्रदेश के हितों के लिए राजनीति से उठकर प्रधानमंत्री से मिलकर  revenue deficit grant के मुद्दे को रखते और हिमाचल प्रदेश में आई आपदा से प्रभावित लोगों की मदद के लिए कार्य करते।

उन्होंने कहा कि “बीजेपी की केंद्र सरकार हर संभव तरीके से हिमाचल की सरकार को कमजोर करना चाहती है, लेकिन मुख्यमंत्री ने राजनीतिक दबावों के आगे झुकने के बजाय जनता के हितों को सर्वोपरि रखा। यही कारण है कि आपदा के कहर के बाद भी प्रदेश में विकास की रफ्तार थमी नहीं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब हिमाचल में गैर-एनडीए सरकार सत्ता में आती है, तब केंद्र सरकार वित्तीय सहायता में कटौती, संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी और आर्थिक दबाव जैसे कदम उठाती है, जो संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है।

जगदीश रेड्डी ने दो टूक कहा,“हिमाचल प्रदेश किसी से भीख नहीं मांगता। RDG हमारा संवैधानिक अधिकार है, जिसे राजनीतिक कारणों से छीना जा रहा है।”

प्रेस वार्ता में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार राज्य को आर्थिक रूप से कमजोर करने की नीति पर अड़ी रहती है, तो हिमाचल प्रदेश आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ेगा। इसके लिए उन्होंने 10-सूत्रीय आत्मनिर्भर हिमाचल रोडमैप का उल्लेख किया, जिसमें हाइड्रो पावर रॉयल्टी बढ़ाना, ग्रीन टैक्स को सशक्त करना, पर्यटन से सतत राजस्व, सरकारी संपत्तियों का मोनेटाइजेशन (बिक्री नहीं), कृषि-बागवानी में वैल्यू एडिशन और टैक्स चोरी पर सख़्ती जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।

उन्होंने कहा, कि “हिमाचल की नदियाँ, जंगल और जवान पूरे देश की सेवा करते हैं। ऐसे राज्य के साथ सौतेला व्यवहार करना न केवल अन्याय है, बल्कि देश की एकता और संघीय व्यवस्था के लिए भी खतरनाक है।”

जगदीश रेड्डी ने केंद्र सरकार से मांग की कि या तो Revenue Deficit Grant को तुरंत बहाल किया जाए, या फिर आपदा-संवेदनशील पहाड़ी राज्यों के लिए विशेष राजस्व सहायता पैकेज घोषित किया जाए।

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