सर्वोच्च न्यायलय  का बड़ा फैसला: अपीलकर्ता को नियुक्ति देने के निर्देश, राज्य सरकार पर लगाया 5 लाख रुपये का जुर्माना

अमर ज्वाला//नई दिल्ली

सर्वोच्च  न्यायालय ने अधिवक्ता प्रभु नेगी (याचिकाकर्ता) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र जारी करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुभाष चंद्रन के.आर. ने पैरवी की।

यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया, जिसमें निर्णय न्यायमूर्ति संदीप मेहता द्वारा लिखा गया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 29 सितम्बर 2020 का पूर्व निर्णय न्यायिक परीक्षण में खरा नहीं उतरता और उसे निरस्त कर दिया गया है।

न्यायालय के आदेश के अनुसार, याचिकाकर्ता को संबंधित भर्ती प्रक्रिया के तहत एडीए (ADA) पद पर नियुक्त किया जाएगा। यदि किसी तकनीकी कारण से उक्त पद उपलब्ध नहीं होता है, तो राज्य सरकार को एक अतिरिक्त (supernumerary) पद सृजित कर याचिकाकर्ता को समायोजित करना होगा।

फैसले में यह भी कहा गया है कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 19 सितम्बर 2019 से प्रभावी मानी जाएगी और उसे उस तिथि से सभी नॉटशनल लाभ प्रदान किए जाएंगे।

न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता को मेरिट में होने के बावजूद अनुचित रूप से नियुक्ति से वंचित रखा गया और उसे लंबी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार पर 5 लाख रुपये का खर्च (cost) लगाया है, जिसे चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को अदा करना होगा।

यह निर्णय न केवल याचिकाकर्ता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *