जलशक्ति योजनाओं के लिए भूमि दान करने वाले परिवारों को भर्ती में मिले प्राथमिकता, उपमुख्यमंत्री की दूरदृष्टि बन सकती है नई मिसाल

जलशक्ति योजनाओं के लिए भूमि दान करने वाले परिवारों को भर्ती में मिले प्राथमिकता, उपमुख्यमंत्री की दूरदृष्टि बन सकती है नई मिसाल

सुभाष ठाकुर*******

हिमाचल प्रदेश के जलशक्ति विभाग में इन दिनों प्रदेश के विभिन्न जिलों में फिटर और पैरा पंप ऑपरेटर सहित विभिन्न पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। इन पदों के लिए आवेदन भी आमंत्रित किए जा चुके हैं और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में ग्रामीण क्षेत्रों से एक महत्वपूर्ण सुझाव सामने आया है कि जिन परिवारों ने विभाग की पेयजल एवं विकासात्मक योजनाओं के निर्माण के लिए अपनी निजी भूमि जनहित में स्वेच्छा से अनुदान स्वरूप उपलब्ध कराई है, उनके पात्र सदस्यों को भर्ती में प्राथमिकता देने पर सरकार विचार करे।

प्रदेश के किसान और बागवान वर्षों से जलशक्ति विभाग की योजनाओं के लिए अपनी मलकियत भूमि उपलब्ध कराते रहे हैं। इन्हीं भूमियों पर पेयजल स्रोत, पंप हाउस, भंडारण टैंक तथा अन्य आवश्यक ढांचों का निर्माण कर लाखों लोगों तक पेयजल पहुंचाया जाता है। विभाग भूमि मालिकों से शपथ पत्र (एफिडेविट) लेकर निर्माण कार्य शुरू करता है, लेकिन अधिकांश मामलों में भूमि उपलब्ध कराने वाले परिवारों को इसके बदले कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल पाता।

ग्रामीणों का सुझाव है कि यदि ऐसे परिवार का कोई सदस्य फिटर, पैरा पंप ऑपरेटर या संबंधित ट्रेड में डिप्लोमा धारक है तथा निर्धारित योग्यता और अनुभव रखता है, तो नियमानुसार पात्रता पूरी करने की स्थिति में उसे भर्ती प्रक्रिया में प्राथमिकता देने का प्रावधान किया जाना चाहिए।

प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में भी स्थानीय हितों और जनसहभागिता को ध्यान में रखते हुए कुछ श्रेणियों में प्राथमिकता आधारित चयन की व्यवस्था समय-समय पर अपनाई जाती रही है। इसी प्रकार की नीति जलशक्ति विभाग में भी लागू किए जाने पर विचार किया जा सकता है।

उपमुख्यमंत्री एवं जलशक्ति मंत्री मुकेश अग्निहोत्री यदि इस विषय पर दूरदर्शी पहल करते हैं, तो इससे भूमि दान करने वाले परिवारों का सम्मान बढ़ेगा और भविष्य में भी लोग जनकल्याणकारी पेयजल योजनाओं के लिए स्वेच्छा से अपनी भूमि उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित होंगे। इससे विभाग की विकासात्मक परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने में आने वाली कठिनाइयां भी काफी हद तक कम हो सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का मानना है कि यह पहल सामाजिक न्याय, जनसहभागिता और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी। यदि सरकार इस सुझाव पर सकारात्मक निर्णय लेती है, तो यह न केवल भूमि दान करने वाले परिवारों के योगदान का सम्मान होगा, बल्कि जलशक्ति विभाग की विकास योजनाओं को भी दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

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