अमर ज्वाला//मंडी
फल एवं सब्जियों की दुकानों पर रेट लिस्ट प्रदर्शित न करने और निर्धारित दरों के अनुपालन में लापरवाही बरतने वाले दुकानदारों के खिलाफ खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने लगातार दूसरे दिन सख्त कार्रवाई की। मंडी शहर में विभाग की निरीक्षण टीम ने कार्रवाई करते हुए 12 दुकानदारों के चालान किए तथा 405 किलोग्राम फल एवं सब्जियां जब्त कीं।

रविवार 27 अगस्त को इंस्पेक्टर ग्रेड-I, इंस्पेक्टर ग्रेड-I परस राम ने संयुक्त रूप से मंडी शहर की फल एवं सब्जी की दुकानों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई दुकानों पर निर्धारित रेट लिस्ट प्रमुखता से प्रदर्शित नहीं पाई गई। विभागीय नियमों के उल्लंघन पर टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए 12 दुकानदारों के चालान किए और 405 किलो फल-सब्जियां जब्त कर लीं।

गौरतलब है कि एक दिन पहले भी जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति अधिकारी स्वयं फील्ड में उतरकर दुकानों का निरीक्षण कर चुके हैं। इसके अगले ही दिन विभागीय निरीक्षण दल द्वारा मंडी शहर में दोबारा कार्रवाई किए जाने से साफ है कि विभाग ने अब फल-सब्जी कारोबार में मनमानी पर शिकंजा कसने का रुख अपना लिया है।
वर्षों से उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा असर
फल एवं सब्जी विक्रेताओं द्वारा रेट लिस्ट प्रदर्शित न करने की शिकायतें कोई नई बात नहीं हैं। पिछले कई वर्षों से मंडी शहर सहित विभिन्न क्षेत्रों में यह सवाल उठता रहा है कि जब दुकान पर रेट ही प्रदर्शित नहीं किया जाता तो उपभोक्ता को किस दर पर सामान बेचा जा रहा है, इसका पता कैसे चले? रेट लिस्ट के अभाव में आम उपभोक्ता को मनमानी कीमत वसूलने की आशंका बनी रहती है।

रेट लिस्ट केवल कागज का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि उपभोक्ता के अधिकार और दुकानदार की जवाबदेही से जुड़ी व्यवस्था है। यदि निर्धारित दरें स्पष्ट रूप से दुकान पर प्रदर्शित हों तो ग्राहक भी खरीदारी से पहले कीमत की जानकारी हासिल कर सकता है और मनमानी वसूली पर सवाल उठा सकता है।
लगातार दूसरे दिन कार्रवाई से बढ़ी उम्मीद
विभाग द्वारा लगातार दूसरे दिन कार्रवाई किए जाने से उपभोक्ताओं में उम्मीद जगी है कि अब बाजार में रेट लिस्ट और निर्धारित दरों की व्यवस्था को गंभीरता से लागू करवाया जाएगा। अधिकारियों ने दुकानदारों को निर्देश दिए कि रेट लिस्ट दुकान पर स्पष्ट और प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करें तथा उपभोक्ताओं को निर्धारित दरों के अनुसार ही फल एवं सब्जियां उपलब्ध करवाएं।
अब देखना यह है कि विभाग की यह कार्रवाई केवल निरीक्षण और चालान तक सीमित रहती है या आने वाले दिनों में भी बाजार में नियमित निगरानी जारी रखकर वर्षों से चली आ रही कथित मनमानी वसूली पर प्रभावी अंकुश लगाया जाता है।
