आईआईटी मंडी के पालमपुर विस्तार पर उठे सवाल, अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने मांगा भूमि चयन का जवाब

अमर ज्वाला//मंडी

आईआईटी मंडी के पालमपुर में प्रस्तावित विस्तार परिसर को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। द्रंग विधानसभा क्षेत्र के इलाका शनोर निवासी एवं अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने इस परियोजना के लिए प्रस्तावित भूमि तथा आईआईटी मंडी के पास पहले से उपलब्ध जमीन के उपयोग को लेकर संस्थान प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

एक वर्ष पूर्व यही मामला पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर ने भी उजागर किया हुआ था लेकिन उसके बाद पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर ने जो प्रेस वार्ता में बातें कहीं थी आगामी कार्यवाही अभी तक नहीं हो पाई है ।

मंडी में आयोजित प्रेस वार्ता में उदयनंद शर्मा ने कहा कि उन्हें पालमपुर में आईआईटी मंडी के सैटेलाइट अथवा विस्तार परिसर की योजना की जानकारियां मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पालमपुर में बड़े भू-भाग को लीज पर लेने की प्रक्रिया चल रही है तो पहले यह सार्वजनिक किया जाना चाहिए कि आईआईटी मंडी के मौजूदा परिसरों के लिए उपलब्ध भूमि का अब तक कितना उपयोग हुआ है।

शर्मा के अनुसार, कमांद स्थित आईआईटी मंडी परिसर के लिए करीब 503 एकड़ भूमि उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त भ्यूली में लगभग 28 एकड़ तथा घोड़ा फार्म क्षेत्र के समीप करीब 8 एकड़ भूमि आईआईटी के नाम लीज पर होने की जानकारी उन्होंने दी। उनके अनुसार, इन सभी को मिलाकर संस्थान के पास करीब 539 एकड़ भूमि उपलब्ध है। ऐसे में पालमपुर में अतिरिक्त भूमि लेने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

उन्होंने आईआईटी मंडी के निदेशक और रजिस्ट्रार से मांग की कि संस्थान के पास उपलब्ध भूमि के वर्तमान उपयोग, प्रस्तावित परियोजनाओं और भविष्य की आवश्यकताओं का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने कहा कि द्रंग क्षेत्र के घोघरधार और बासाधार जैसे स्थानों पर भी भूमि उपलब्ध होने की बात सामने आती रही है और ये क्षेत्र कमांद परिसर के अपेक्षाकृत नजदीक हैं। ऐसे में विस्तार परिसर के लिए पालमपुर का चयन करने के पीछे तकनीकी, प्रशासनिक अथवा शैक्षणिक कारण क्या हैं, इसकी जानकारी भी लोगों को दी जानी चाहिए।

अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि उन्होंने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एक्ट, 1961 का अध्ययन किया है और कानून में आईआईटी के विस्तार, उप-परिसर अथवा सैटेलाइट परिसर से संबंधित प्रावधानों को लेकर कुछ सवाल उनके सामने आए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर उनका कानूनी अध्ययन अभी जारी है और दस्तावेजों के आधार पर ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

शर्मा ने बताया कि मामले से जुड़े दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड हासिल करने के लिए आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी गई है। रिकॉर्ड मिलने के बाद भूमि आवंटन, लीज प्रक्रिया, संस्थान की आवश्यकता और प्रस्तावित परिसर की कानूनी स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजों के अध्ययन के बाद कोई कानूनी अथवा प्रक्रियागत विसंगति सामने आती है तो उचित कानूनी कदम उठाने पर विचार किया जाएगा।

उन्होंने आईआईटी मंडी प्रशासन से मांग की कि पालमपुर में प्रस्तावित परिसर के लिए भूमि चयन का आधार, परियोजना का उद्देश्य, अनुमानित भूमि आवश्यकता और आईआईटी मंडी के पास उपलब्ध भूमि के उपयोग की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों के बीच बने असमंजस को दूर किया जा सके।

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