एफआईआर नंबर 0118 में बीएनएस की धारा 103 व 3(5) के तहत तीन युवक नामजद, पधर पुलिस ने तेज की जांच; पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा
सुभाष ठाकुर*******
चौहार घाटी की रोपा पंचायत के 32 वर्षीय अजय कुमार पुत्र शेर सिंह की ग्वाली में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। ढाबे के बाहर तीन युवकों के साथ कथित विवाद और उसके बाद अजय के सड़क पर बेसुध मिलने के मामले में अब पधर पुलिस ने हत्या की धारा के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पधर थाना में दर्ज एफआईआर नंबर 0118, दिनांक 6 सितंबर 2026 में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103 और धारा 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एफआईआर में तीन युवकों को नामजद किया गया है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार इनमें साहिल निवासी नौहली, तहसील पधर, नवीन कुमार निवासी चामाह तथा आदित्य ठाकुर निवासी कटिपारी, पधर शामिल हैं। मामले की जांच पुलिस अधिकारी को सौंपी गई है।
विवाद के बाद सड़क पर बेसुध मिला अजय
एफआईआर में दर्ज शिकायत के अनुसार 6 सितंबर को ग्वाली में अजय कुमार और तीन युवकों के बीच विवाद हुआ। शिकायत में अजय के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद अजय सड़क पर बेसुध अवस्था में मिला।
मौके पर मौजूद लोगों ने उसे संभालने का प्रयास किया और बाद में उपचार के लिए पधर अस्पताल पहुंचाया। पधर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने अजय की गंभीर हालत को देखते हुए उसे मंडी रेफर कर दिया। जोनल अस्पताल मंडी पहुंचने पर चिकित्सकों ने अजय को मृत घोषित कर दिया।
‘गिर गया था’—अस्पताल में क्या बताया गया, जांच में सामने आएगा
घटना को लेकर अब एक अहम सवाल यह भी उठ रहा है कि अजय को अस्पताल ले जाने के दौरान चिकित्सक को घटना के बारे में क्या जानकारी दी गई।
परिजनों और घटनाक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों की ओर से शुरुआत में अजय के सड़क पर गिरने की बात बताई गई थी। वहीं बाद में पुलिस में दर्ज शिकायत और घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग तथ्य सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया है।
इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता पुलिस की पूछताछ, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और चिकित्सकीय रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।
ढाबा संचालक के सामने कथित तौर पर कही गई बात भी जांच का अहम हिस्सा
घटनाक्रम के दौरान ढाबा संचालक इंद्र मेहता और उनके साथ वहां काम करने वाले लोगों तथा मकान मालिक की मौजूदगी को लेकर भी जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
घटनाक्रम से जुड़े लोगों के अनुसार ढाबा संचालक इंद्र मेहता ने पुलिस के समक्ष यह जानकारी दी है कि तीन युवकों में से एक युवक ने कथित तौर पर कहा—“मैंने मारा है पंच।”
बताया जा रहा है कि इसके बाद अजय को तत्काल अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। हालांकि इस कथित बातचीत का वास्तविक संदर्भ क्या था और युवक ने किस परिस्थिति में यह बात कही, यह पुलिस जांच का विषय है। इस संबंध में ढाबा संचालक, ढाबे में मौजूद कर्मचारियों और मकान मालिक के बयान बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
किस चोट से हुई मौत ? पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी जांच
अब इस मामले की सबसे अहम कड़ी अजय कुमार की पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी। अजय के शरीर पर किस प्रकार की चोटें थीं, मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या रहा और क्या चोटें मृत्यु से संबंधित थीं—इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच से मिलने की उम्मीद है।
जोनल अस्पताल मंडी से अजय को नेरचौक मेडिकल कॉलेज ले जाकर पोस्टमार्टम करवाया गया। परिजनों को आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद करीब दोपहर 3:15 बजे शव सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस को पहले ‘गिरने से मौत’ की सूचना, रिश्तेदारों ने जताई हत्या की आशंका
मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शुरुआती सूचना में अजय के गिरने से घायल होने और बाद में मौत होने की बात पुलिस तक पहुंची थी। बताया जा रहा है कि अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई।
बाद में अजय के रिश्तेदारों ने पुलिस अधीक्षक मंडी के समक्ष हत्या की आशंका जताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मंडी ने डीएसपी स्तर के अधिकारी को जांच तेज करने के निर्देश दिए। इसके बाद मामले में पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ी और एफआईआर में हत्या की धारा जोड़ी गई।
अब पुलिस के सामने यह पता लगाना चुनौती है कि ग्वाली में अजय के साथ वास्तव में क्या हुआ था और अस्पताल पहुंचने से पहले घटनास्थल पर मौजूद तीनों युवकों की क्या भूमिका थी।
अस्पताल पहुंचाने वालों की भूमिका भी जांच के दायरे में
अजय को पधर अस्पताल पहुंचाने वालों में बल्ह टिक्कर पंचायत के त्रैला गांव का एक युवक, टिक्कर गांव का एक युवक तथा अजय की बुआ का बेटा शामिल होने की बात बताई जा रही है।
इन लोगों ने अजय को किस हालत में देखा, उसे अस्पताल तक कैसे पहुंचाया गया, रास्ते में उसकी क्या स्थिति थी और अस्पताल में चिकित्सक को क्या जानकारी दी गई—इन सभी बिंदुओं को पुलिस जांच में शामिल किया जाना जरूरी है।
पुलिस अब घटनास्थल पर मौजूद लोगों, ढाबा संचालक, ढाबे में काम करने वालों, मकान मालिक तथा अस्पताल पहुंचाने वाले लोगों के बयान दर्ज कर सकती है। इसके साथ ही घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उपलब्ध फोरेंसिक साक्ष्य जांच की दिशा तय करेंगे।
‘ऐसी गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं’—रिश्तेदारों में आक्रोश
अजय की मौत की सूचना के बाद चौहार घाटी से करीब दो दर्जन से अधिक लोग जोनल अस्पताल पहुंचे। परिजनों और रिश्तेदारों में घटना को लेकर भारी आक्रोश है।
रिश्तेदारों का कहना है कि यदि अजय के साथ मारपीट हुई है और उसकी मौत उसी घटनाक्रम में हुई है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि ऐसी कथित गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और परिवार को न्याय मिलने तक वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।
परिजनों का कहना है कि वे मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
एक माह में रोपा गांव ने खोए दो युवा
अजय कुमार की मौत ने रोपा पंचायत के लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया है। रोपा गांव ने महज एक महीने के भीतर दो युवकों को खो दिया है।
बताया जा रहा है कि अजय कुमार मंडी में रहकर अपनी पढ़ाई और टेस्ट की तैयारी कर रहा था। उसने पुरानी मंडी में कमरा ले रखा था और पढ़ाई में जुटा हुआ था। 5 सितंबर, भाद्रपद 20 को वह हिमरी गंगा तीर्थ स्नान के लिए गया था। शाम को वह पधर के समीप ग्वाली में अपनी बुआ के घर रहने के लिए गया था।
बुआ का घर सड़क के साथ स्थित है और वहां का परिसर ढाबा संचालन के लिए इंद्र मेहता को लीज पर दिया गया बताया जा रहा है। इसी स्थान पर अजय और तीन युवकों के बीच कहासुनी और कथित मारपीट की घटना सामने आई है।
अब पुलिस जांच खोलेगी मौत का राज
मामला हत्या की धारा में दर्ज होने के बाद पुलिस जांच निर्णायक चरण में पहुंच गई है। हालांकि एफआईआर में नामजद तीनों युवकों पर लगाए गए आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अदालत में दोष सिद्ध होना बाकी है।
अजय की मौत की वास्तविक वजह क्या थी, उसके शरीर पर लगी चोटें किस प्रकार की थीं, विवाद के दौरान वहां क्या हुआ, कथित मारपीट में किसकी क्या भूमिका थी और अस्पताल पहुंचने तक घटनाक्रम में क्या-क्या हुआ—इन सभी सवालों के जवाब पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आने हैं।
फिलहाल एफआईआर ने मामले को नया मोड़ दे दिया है और अब निगाहें पधर पुलिस की जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
