अमर ज्वाला//मंडी
शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के 119वें जन्मदिन पर शहीद भगत सिंह विचार मंच की ओर से न्यायलय परिसर में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता और प्रसिद्ध शायर रवि राणा ‘शाहीन’ ने की। गोष्ठी में शहीद भगत सिंह के लेख “साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज“ का पाठ किया गया। मंच के संयोजक समीर कश्यप ने बताया कि वर्तमान संदर्भ में बेहद प्रासांगिक भगत सिंह के इस लेख में कहा गया है कि “साम्प्रदायिक दंगों का इलाज यदि कोई हो सकता है तो वह भारत की आर्थिक दशा में सुधार से ही हो सकता है। भूख और दुख से आतुर होकर मनुष्य सभी सिद्धान्त ताक पर रख देता है। लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने के लिए वर्ग चेतना की ज़रूरत है। ग़रीब मेहनतकश व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूँजीपति हैं, इसलिए तुम्हें इनके हथकण्डों से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी ग़रीबों के, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्र के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एकजुट हो जाओ और सरकार की ताक़त अपने हाथ में लेने का यत्न करो। इन यत्नों में तुम्हारा नुकसान कुछ नहीं होगा, इससे किसी दिन तुम्हारी ज़ंजीरें कट जाएँगी और तुम्हें आर्थिक स्वतन्त्रता मिलेगी।“ विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं का कहना था कि भगतसिंह के विचार आज भी उतने ही प्रासांगिक हैं जितने करीब सौ पहले इस लेख को लिखते समय थे। गोष्ठी में अभिषेक लखनपाल, ललित ठाकुर, गीतांजलि शर्मा, सतीश ठाकुर, मोहित शर्मा, मनीष कटोच, सुशील चौहान, हंस राज, रमेश्वर ठाकुर, खेम चंद, तेजभान सिंह, नरेन्द्र कुमार, हुक्म चंद वर्मा, अमन, मिशन दत्त और विनोद कुमार सहित मंच के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।
