बीबीएमबी से 20 साल में 11,973 मिलियन यूनिट बिजली, जेएसडब्ल्यू में 18 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार बहाल, वाइल्ड फ्लावर हॉल से 401 करोड़ का लाभ; किशाऊ समझौते से आर्थिक बोझ घटाने की पहल
सुभाष ठाकुर*******
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दूरदर्शी सोच और हिमाचल के हितों को सर्वोपरि रखने की नीति के तहत प्रदेश सरकार ने बिजली, जल संसाधनों और सरकारी संपत्तियों से जुड़े पुराने विवादों को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया है। व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ सरकार प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई न्यायालयों और अंतरराज्यीय स्तर पर मजबूती से लड़ रही है। इसका परिणाम बीबीएमबी बिजली बकाया मामले में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले, जेएसडब्ल्यू परियोजना में मुफ्त बिजली के अधिकार की बहाली और वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में आर्थिक लाभ के रूप में सामने आया है। किशाऊ बांध समझौते से भी प्रदेश के संभावित वित्तीय बोझ को कम करने का रास्ता खुला है। दशकों से लंबित मामलों में मिली इन राहतों से हिमाचल के आर्थिक हितों को नई मजबूती मिली है।
बीबीएमबी: 30 साल की लड़ाई का फैसला
वर्ष 1996 में हिमाचल ने सुप्रीम कोर्ट में बीबीएमबी की बिजली हिस्सेदारी को लेकर मुकदमा दायर किया था। वर्ष 2011 में प्रदेश की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार तय हुआ। अब 6 नवंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बकाये का निपटारा करते हुए पंजाब और हरियाणा को 20 वर्षों में हिमाचल को 11,973 मिलियन यूनिट बिजली देने के निर्देश दिए हैं। इससे प्रदेश को औसतन हर साल करीब 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। यह फैसला हिमाचल के बिजली अधिकारों की लड़ाई में महत्वपूर्ण पड़ाव है।
जेएसडब्ल्यू: 18 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार

1,045 मेगावाट की करछम-वांगतू परियोजना में 18 प्रतिशत मुफ्त बिजली के अधिकार को लेकर कंपनी के साथ विवाद हुआ। प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की और 16 जुलाई 2025 को हिमाचल के पक्ष में फैसला आया। इससे प्रदेश का 18 प्रतिशत मुफ्त बिजली का अधिकार बहाल हुआ और अतिरिक्त राजस्व का रास्ता खुला।
वाइल्ड फ्लावर हॉल: 401 करोड़ का लाभ

शिमला के मशोबरा स्थित वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल के विवाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 31 मार्च 2025 को प्रदेश सरकार ने होटल का भौतिक कब्जा प्राप्त किया। इसके बाद वित्तीय विवाद की न्यायिक प्रक्रिया में प्रदेश को लगभग 401 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ। यह सरकारी संपत्ति और वित्तीय हितों की रक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
किशाऊ बांध 2,000 करोड़ के बोझ से राहत

15 सितंबर 2026 को छह राज्यों के बीच हुए समझौते के तहत किशाऊ बांध परियोजना के बिजली घटक पर हिमाचल के संभावित 2,000 करोड़ रुपये के वित्तीय बोझ को लाभार्थी राज्यों के बीच साझा करने पर सहमति बनी। इससे प्रदेश के आर्थिक हितों को राहत मिली है।
शानन परियोजना: अधिकारों की लड़ाई जारी

मंडी जिला के जोगिंद्रनगर स्थित 110 मेगावाट की शानन जलविद्युत परियोजना को वापस लेने के लिए प्रदेश सरकार की कानूनी लड़ाई जारी है। 99 वर्ष की लीज से जुड़े इस मामले में अभी अंतिम न्यायिक फैसला आना बाकी है।
जल उपकर: अदालत में चुनौती
जलविद्युत परियोजनाओं पर जल उपकर लगाने के प्रदेश सरकार के कानून को 5 मार्च 2024 को हिमाचल हाईकोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था। यह मामला सरकार के लिए कानूनी चुनौती बना हुआ है।
हिमाचल के संसाधनों पर प्रदेश के अधिकार, सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देने की नीति के तहत सरकार की पैरवी अब कई पुराने विवादों को परिणाम तक पहुंचा रही है। बीबीएमबी का मुकदमा वर्ष 1996 में शुरू हुआ था और 2011 में मूल हिस्सेदारी तय हुई थी, इसलिए इन सफलताओं में पूर्ववर्ती सरकारों के प्रयासों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अब असली कसौटी इन फैसलों को जमीन पर लागू करवाकर प्रदेश की आय और विकास को मजबूत करना होगा।
