कृषि विभाग परियोजनाओं की ‘निकास नीति’ पर काम करेगा; प्रो. चंद्र कुमार

100सिंचाई उपपरियोजनाएं मार्च के अंत तक पूरी हो जाएंगी

अमर ज्वाला //शिमला

हिमाचल प्रदेश के कृषि मंत्री प्रोफेसर चंद्र कुमार ने विभाग को परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उनके संचालन और प्रबंधन के लिए ‘निकास नीति‘ पर काम करने का निर्देश दिया और कृषि अनुसंधान संस्थानों को शुष्क भूमि कृषि पद्धतियों के मानकीकरण की संभावना तलाशने पर जोर दिया।

प्रोफेसर चंद्र कुमार मंगलवार को यहां राज्य में JICA–ओडीए वित्त पोषित कृषि परियोजना के चरण-2 के कार्यान्वयन में लगे हिमाचल प्रदेश कृषि विकास सोसायटी की शासी परिषद की पहली बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण संवर्धन परियोजना के 1010 करोड़ रुपये के दूसरे चरण की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रो. कुमार ने राज्य कृषि विश्वविद्यालय से राज्य में कृषि उपज, विशेषकर सब्जियों की उपलब्धता पर रणनीतिक अनुसंधान और योजना पर ध्यान केंद्रित करने को कहा, क्योंकि पड़ोसी राज्यों से आपूर्ति अपर्याप्त है और किसानों को उनकी उपज के लिए अच्छे मूल्य प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। उन्होंने विदेशी सब्जियों के संकर बीजों के विकास पर अनुसंधान की आवश्यकता पर भी बल दिया।

परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने बैठक में परियोजना की प्रगति को दर्शाते हुए एक प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि JICA मिशन और डीओए इस बात पर सहमत हुए हैं कि पूरी परियोजना लागत 1,010 करोड़ रुपये अनुमानित है, जिसमें से 807 करोड़ रुपये ऋण घटक हैं। उन्होंने कहा कि 2021 में शुरू की गई JICA कृषि परियोजना का चरण-2 हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों में 38,000 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र को कवर करेगा, जिससे 25,000 किसान परिवार लाभान्वित होंगे।

बुनियादी ढांचे के विकास घटक के तहत 2029 तक परियोजना अवधि के नौ वर्षों में खर्च किए जाने वाले 330.70 रुपये के कुल परिव्यय में से लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। 296 सिंचाई उप–परियोजनाओं में से 100 इस साल मार्च के अंत तक लाभार्थियों को सिंचाई सुविधाएं प्रदान करना शुरू कर देंगी। साथ ही, अगले वित्तीय वर्ष 2026 के अंत तक 100 और उप–परियोजनाएँ पूरी हो जाएँगी।

किसानों के समर्थन घटक पर परियोजना का परिव्यय 108.50 रुपये है और 12.08 रुपये खर्च किए जा चुके हैं। मूल्य श्रृंखला और बाजार विकास पर लक्षित 63.30 करोड़ रुपये में से परियोजना ने 41.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 13 मार्केटिंग यार्ड के विकास के लिए राज्य के विपणन बोर्ड को 31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने परियोजना के पहले चरण की प्रगति के बारे में जानकारी ली और उप–परियोजना क्षेत्रों के लिए ‘एग्जिट–पॉलिसी‘ और सहायता के बारे में पूछा। डॉ. सुनील चौहान ने मंत्री को एग्जिट–पॉलिसी बनाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि पिछले उप–परियोजना क्षेत्रों के किसानों को संगठित विपणन व्यवस्था और किसान उत्पादक संगठनों से भी जोड़ा जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. आर. पटेल ने राष्ट्रीय कृषि योजना और अन्य योजनाओं के तहत ‘एग्जिट–पॉलिसी‘ के लिए राज्य को सहायता देने का आश्वासन दिया।

परियोजना निदेशक डॉ. चौहान ने 210 सिंचाई उप–परियोजनाओं के निर्माण के लिए पांच संभावित कृषि जिलों में फसल विविधीकरण मॉडल स्थापित करने के लिए 321 करोड़ रुपये की परियोजना के चरण-1 की उपलब्धियों का विवरण दिया। यह परियोजना फरवरी, 2011 में शुरू हुई और जून, 2021 में पूरी हुई और इसने 3712 हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले 4,671 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र को कवर किया और 128 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की। 2011 में प्रति हेक्टेयर सकल वार्षिक औसत कृषि आय 55,000 रुपये थी जिसे 1.45 लाख रुपये की लक्षित आय के मुकाबले बढ़ाकर 2.40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया और 165 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई।

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