अमर ज्वाला//मंडी
धर्मपुर सरकाघाट से 25 किलोमीटर दूर हक गरली के साथ लगता छोटा सा गांव साहन में आजादी के 78 वर्ष बाद भी सड़क सुविधा नहीं है। इस गांव में आज से 25 वर्ष पहले लगभग 100 आदमी रहते थे, लेकिन अब यह गांव पूरी तरह से खाली हो चुका है।
पिछले कल इस गांव की कौशल्या देवी उम्र 80 वर्ष 1000 फुट से भी ऊंची ढांक से गिरकर मृत्यु को प्राप्त हो गई। इस गांव के लिए पैदल चलने के लिए रास्ते भी नहीं हैं। जो रास्ते 50-100 वर्षों से बने थे, उन्हें सड़क बनाने के लिए जेसीबी से तोड़ दिया गया और अब ना ही सड़क बनी है और ना ही रास्ते बचे हैं।
ग्रामीणों ने बड़ी मुश्किलकों ने महिला के शव को सरकाघाट थाने में पहुंचा रिपोर्ट करवाई और अस्पताल में ले जाकर पोस्टमार्टम करवाया। प्रशासन ने ₹25000 की राहत राशि प्रदान की, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण विभाग और नेताओं की लापरवाही के कारण करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी सड़क नहीं बनी। अब पैदल चलने के लिए भी गांव के लोगों के पास रास्ता नहीं है, जिसके कारण लोगों को ऊंची ढांक से होकर जाना पड़ता है।
यह घटना एक बार फिर से सड़क सुविधा की मांग को लेकर ग्रामीणों के संघर्ष को उजागर करती है। ग्रामीण सड़क सुविधा की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है।
