चौहार घाटी के किसानों की अनदेखी: कृषि विभाग की लतीफी

सुभाष ठाकुर*******

कृषि विभाग चौहार घाटी के किसानों को समृद्ध बनाने के लिए किसी भी अधिकारी द्वारा कोई उचित कदम नहीं उठा रहा है। चौहार घाटी के दुर्गम क्षेत्र के किसानों तक सरकार की किसी भी विकासात्मक योजनाओं का अभाव देखा गया है।

कृषि उपनिदेशक डॉक्टर रामा चंद्र के सिवाय ऐसे किसी कृषि उपनिदेशक ने चौहार घाटी के किसानों के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाया कि घाटी के किसानों की मिट्टी की जांच कर किसानों की गुणवत्ता बढ़ाई जाए। कृषि उपनिदेशक द्वारा चौहार घाटी की सभी पंचायतों के लिए विशेष अभियान शुरू किया हुआ है कि किसानों की मिट्टी जांच मोबाइल लैब पंचायत तक पहुंचा कर किसानों की मिट्टी की जांच की जा रही है ,जिसमें सनवाड और बथेरी पंचायत के किसानों की मिट्टी की जांच कृषि मृदा मोबाईल वाहन द्वारा की गई है। जिसकी रिपोर्ट कुछ दिनों बाद किसानों को मृदा कार्ड के साथ दी जाएगी।

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कृषि उपनिदेशक डॉक्टर राम चंद्रा चौधरी के सिवाय अन्य किसी उपनिदेशक द्वारा  चौहार घाटी की परंपरागत फसलों की गुणवत्ता में आ रही भारी कमी के सुधारीकरण के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाए।

 

हल्दी रंग का यह मशहूर और स्वादिष्ट जायकेदार इस राजमाह के राजा भी दीवाने रहे और उनके खाने की सामग्रियों में चौहार घाटी का यह हल्दी रंग का राजमाह उनकी पहली पसंद माना गया है । यही नहीं शादी समारोह में हल्दी रंग का यह राजमाह मंडी से लेकर समूचे हिमाचल की धामों में भी दम का जायका परोसा जाता रहा लेकिन अब विभिन्न प्रजाति और बाहरी देशी और विदेशी राजमाह बाजार में आ चुके हैं।

चौहार घाटी के बरोट क्षेत्र के साथ साथ अन्य घाटी के क्षेत्र में आज भी हल्दी रंग के उस मशहूर और स्वादिष्ट राजमाह की खेती की जा रही है, गुणवत्ता में जरूर कमी आई है । बरोट के बाजार की दुकानों में ऑर्गेनिक फसलों की लोकल दालों में यह हल्दी रंग वाला 320, भूरा रंग 350, और लाल वाल 250/रूपये प्रति किलो बिक्री हो रही है ।

विडंबना यह है कि विभाग कुछ किसानों को थोड़ा सा बीज मुफ्त आवंटित जरूर करता है लेकिन दुर्गम क्षेत्र से दूर बैठ कर कृषि अधिकारी अपने कार्यालय से बैठ कर घाटी के किसानों की मिट्टी के आंकड़ों से अपना रिकॉर्ड भरते रहे हैं। किसानों की खेती तक पहुंच कर कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों द्वारा किसानों को यह तक जानकारी नहीं दी गई कि खेतों से किस तरह से मुट्ठी को टेस्टिंग के लिए लाना होता है।

कृषि विभाग द्वारा जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में जिनकी ड्यूटी लगाई गई है क्या उन्होंने कृषि विभाग द्वारा प्रशिक्षित किया हुआ है ?  क्या वह किसानों की खेतों तक पहुंच कर मिट्टी जांच के लिए लाई जाने वाली मिट्टी को उसी तरह से विभिन्न स्थानों से निकालकर जांच करवाते हैं? जांच रिपोर्ट में क्या पाया गया आजतक चौहार घाटी के किसी भी किसानों को वर्षों से जानकारी नहीं कि उनकी खेती में किन किन पोशाक तत्वों की कितनी जरूरत है।

चौहार घाटी की जमीन की मिट्टी की टेस्टिंग कर उसकी उचित जानकारी तक मुहैया नहीं करवाई गई है।

घाटी का एक भी किसान ऐसा नहीं मिला जिसकी खेती की मिट्टी की जांच कर उन्हें उचित पोशाक्तत्वों की जानकारी दी गई हो। बल्कि कागजों में घाटी के किसानों के हक और हुक्कों की खाना पूर्ति जरूर हुई है। चौहार घाटी में होने वाली सभी फसलों की गुणवत्ता में भारी गिरावट आ चुकी है।

चौहार घाटी का हल्दी रंग का राजमाह मंडी राजाओं से लेकर शादी समारोह तथा अन्य आयोजना में सिर्फ इसी राजमाह का बनाया जाता था। इसी के साथ साथ चौहार घाटी के विभिन्न किस्मों के अन्य राजमाह की डालें भी धामों में परोसी जाती थी।

कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र के किसानों को सरकार की विकासात्मक योजनाओं की जानकारी से दूर रखा गया है। किसानों की खेती की मिट्टी में आए बदलाव की जांच नहीं की गई है।

चौहार घाटी की बल्ह टिककर पंचायत में कृषि विभाग का अपना लाखों रूपये का कार्यालय खंडर बन चुका है। इस कार्यालय में फर्नीचर इत्यादि सब सुविधाएं प्रदान होते हुए भी कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इसे खंडर बना डाला है।

कृषि विभाग को चाहिए कि चौहार घाटी के किसानों की मिट्टी की जांच कर किसानों को सरकार की योजनाओं का प्रचार ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच कर किया जाए ताकि सरकार की योजनाओं को धरातल पर किसानों के लिए लाभ मिल सके।

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