सुभाष ठाकुर*******
मानवीय शरीर के दिमाग की नसों में होने वाले अचानक ब्रेन हेमरेज (दिमाग में खून का रिसाव) एक बेहद गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है। कई मामलों में यह लंबे समय की अपंगता या मृत्यु तक का कारण बन जाता है। अगर समय पर सही इलाज मिल जाए, तो मरीज की जान और दिमाग दोनों को बचाया जा सकता है।
फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली में विशेषज्ञ न्यूरोरेडियोलॉजी डॉ. विवेक अग्रवाल ने शनिवार 13 दिसंबर को मंडी में प्रेस वार्ता कर ब्रेन हेमरेज की कई एहम जानकारियां मीडिया से साझा करते हुए कहा कि हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां 30 वर्षीय युवती को अचानक तेज सिरदर्द, चक्कर, बेहोशी और दौरे पड़ने लगे। परिजनों ने बिना देर किए उसे अस्पताल पहुंचाया। जांच में पता चला कि दिमाग की एक खून की नली में फटाव (ब्रेन एन्यूरिज्म) हो गया था, जिससे गंभीर ब्रेन हेमरेज हो रहा था।

डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मिनिमली इनवेसिव एंडोवैस्कुलर कॉइलिंग नामक आधुनिक तकनीक से इलाज किया। इस प्रक्रिया में बिना सिर खोले, एक पतली नली (कैथेटर) के जरिए दिमाग की नस तक पहुंचकर ब्लीडिंग वाले हिस्से को विशेष प्लैटिनम कॉइल से सील कर दिया जाता है। इससे खून का बहना रुक जाता है और ओपन ब्रेन सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती।
फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली के इंटरवेंशनल न्यूरोरेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. विवेक अग्रवाल ने बताया कि यह तकनीक मरीज के लिए ज्यादा सुरक्षित होती है और रिकवरी भी तेजी से होती है। इलाज के बाद युवती की हालत तेजी से सुधरी और चार दिन के भीतर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह लगभग सामान्य जीवन जी रही है। इस पूरी प्रक्रिया में होने वाले खर्च के बारे में पत्रकार ने सवाल किया तो

न्यूरोरेडियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. विवेक अग्रवाल ने कहा कि 2 लाख 50 हजार तक इस प्रक्रिया में खर्च संभव है।
ब्रेन हेमरेज के आम लक्षण जिन पर तुरंत ध्यान दें:

अचानक तेज और असहनीय सिरदर्द
चक्कर आना या उल्टी
बेहोशी या दौरे पड़ना
बोलने या देखने में परेशानी
शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
या सुन्नपन डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे लक्षण दिखते ही समय बर्बाद किए बिना नजदीकी बड़े अस्पताल में ले जाना बेहद जरूरी है। फोर्टिस हॉस्पिटल मोहाली में 24×7 एडवांस्ड न्यूरो-इमेजिंग और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपलब्ध है, जो ऐसी आपात स्थितियों में जीवनरक्षक साबित हो सकती है।
यह मामला आम लोगों के लिए एक अहम संदेश है कि ब्रेन हेमरेज से घबराने की नहीं, बल्कि समय पर पहचान और इलाज की जरूरत है। सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।
