अमर ज्वाला//बजौरा (कुल्लू)।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के बौहरा में स्थित राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल बजौरा में वर्ष 1926 से 2026 के शताब्दी समारोह का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में शिक्षा मंत्री ने कहा कि आनी क्षेत्र के आड़सू स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल लगभग दो सौ वर्ष पुराना है, और इस प्रकार के ऐतिहासिक विद्यालयों की विशेष महत्वता अतीत में भी रही है और भविष्य में भी बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आज स्टेटहुड दिवस के अवसर पर यह देखना गर्व का विषय है कि शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश ने कितना लंबा सफर तय किया है।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि डॉ. वाई.एस. परमार के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश अपने अस्तित्व में आया। उन्होंने बताया कि आजादी के बाद उस दौर में प्रदेश की साक्षरता दर मात्र 7 प्रतिशत थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 13 प्रतिशत था और महिलाओं की साक्षरता दर केवल 2 प्रतिशत थी।
उन्होंने कहा हिमाचल निर्माता डॉक्टर परमार की दूरदर्शी सोच के कारण आज हिमाचल प्रदेश और गोवा पूरे भारत में उच्च साक्षरता के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान 99.30 प्रतिशत पर खड़े हैं।
शिक्षा मंत्री ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि एक समय कुल्लू, लाहौल-स्पीति जैसे क्षेत्र पंजाब राज्य का हिस्सा हुआ करते थे, आज पंजाब की वर्तमान साक्षरता दर लगभग 83 प्रतिशत है, हिमाचल प्रदेश अपने अस्तित्व में आने के बाद तेजी से शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ता गया और वर्तमान में साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। यह शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने बताया कि आजादी के समय प्रदेश में केवल 200 शिक्षण संस्थान थे, जिनमें बजौरा जैसे विद्यालय और मंडी का एकमात्र कॉलेज शामिल था। आज प्रदेश में हजारों शिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, जो शिक्षा के विस्तार की ऐतिहासिक गवाही देते हैं।
शिक्षा मंत्री ने राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल बजौरा के शताब्दी समारोह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान प्रदेश की शिक्षा परंपरा के स्तंभ हैं और भावी पीढ़ियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इस अवसर पर APMC चेयरमैन मियां राम सिंह, पूर्व विधायक खिमी राम, पूर्व विधायक सोहन लाल, जिला अध्यक्ष कुल्लू सेस राम आज़ाद, जेपी आशा ठाकुर, एसडीएम महोदय, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को यादगार बना दिया। शताब्दी समारोह विद्यालय की गौरवशाली विरासत और हिमाचल की शिक्षा क्रांति का जीवंत प्रतीक बना।
