हिमाचल को नहीं मिला बजट का मरहम, सांसदों की खामोशी पर उठे सवाल

अमर ज्वाला //मंडी

मंडी: केंद्रीय बजट 2026-27 में हिमाचल प्रदेश की कथित उपेक्षा को लेकर केंद्र सरकार और प्रदेश के सांसदों पर सवाल उठाए गए हैं। जिला कांग्रेस कमेटी मंडी के प्रवक्ता अधिवक्ता विजय कानव ने कहा कि केंद्र सरकार एक ओर “विकसित भारत 2047” का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की वास्तविक जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

विजय कानव ने कहा कि पिछले साल हुई भीषण वर्षा, भूस्खलन और बाढ़ ने विशेष रूप से मंडी संसदीय क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। सड़कें टूटीं, पुल बह गए, पेयजल योजनाएँ ध्वस्त हुईं और हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई, लेकिन बजट में हिमाचल के लिए कोई विशेष आपदा राहत पैकेज घोषित नहीं किया गया।

 

कानव ने आरोप लगाया कि हिमाचल देश के पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, पूरे उत्तर भारत को जल स्रोत उपलब्ध कराता है, फिर भी उसे उसके योगदान के अनुरूप आर्थिक सहयोग नहीं दिया गया। उन्होंने सांसदों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि आपदा के समय जनता को उम्मीद थी कि उनके प्रतिनिधि संसद में प्रदेश की आवाज मजबूती से उठाएँगे, लेकिन ऐसा प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दिया।

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