आलू की खेती में एआई के उपयोग से हो रही है सालाना करोड़ों रुपए की बचत*

अमर ज्वाला//शिमला

शिमला। केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के निदेशक डॉ ब्रजेश सिंह ने बताया कि आलू अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से न केवल बीमारियों का समय से पहले पता लगाने में मदद मिल रही है बल्कि करीब बीमारियों से निपटने के लिए विभिन उपचारों में लगने वाले 800 करोड़ रुपए भी बच रहे हैं।

डॉ सिंह संस्थान के भ्रमण पर आए ओडिशा के वरिष्ठ पत्रकारों और पीआईबी अधिकारियों के दल को संबोधित कर रहे थे। इस भ्रमण का आयोजन पीआईबी शिमला ने किया था। मीडिया कर्मियों ने संस्थान में आलू पर शोध एवं विकास की झलकियां देखी।

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के निदेशक ने मीडिया कर्मियों से चर्चा के दौरान बताया कि सी डेक की मदद से कई ऐसे एआई टूल्स भी विकसित किए गए हैं जिनके माध्यम से आलू को देखकर उसकी बीमारी का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा ड्रोन से छिड़काव के कारण भी मानव श्रम बच रहा है। उन्होंने बताया कि संस्थान ने अब तक आलू की 76 प्रजातियां तैयार की हैं और इनमें से कुफरी ज्योति, चंद्रमुखी जैसी करीब 30 प्रजातियां आज भी लोकप्रिय हैं।

इस अवसर पर सामाजिक विज्ञान संभाग के अध्यक्ष डॉ आलोक कुमार ने बताया कि संस्थान के द्वारा विकसित की गई किस्मों को किसानों के खेतों तक पहुंचाना और संस्थान के द्वारा विकसित अन्य तकनिकियों को देश के अन्य राज्यों के किसानों को उपलब्ध कराना तथा संस्थान और किसान के मध्य सेतु के रूप में काम करने हेतु उनका विभागकृत संकल्प है।

पौध संरक्षण विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि आलू की फसल पर आने वाली विभिन्न मुख्य बीमारियों में पिछेता झुलसा (Late Blight) की बीमारी जो कि फसल को काफी नुकसान पहुंचाती है उसके प्रबंधन के लिए संस्थान में किए जा रहे कार्य के अलावा बेकटेरियल विल्ट पर कार्यों से अवगत कराया।

डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि संस्थान के फसल सुधार संभाग ने अब तक विभिन्न जलवायु क्षेत्रों के लिए 76 से अधिक किस्मों को विकसित किया है। देश की निरंतर उन्नत बीज की आवश्यकता संस्थान द्वारा ही पुरी की जा रही है। डॉ. जगदेव शर्मा ने संस्थान के फसल उत्पादन संभाग की गतिविधियों के बारे में बताया कि आलू पर होने वाली कृषि क्रियाओं जैसे संतुलित उर्वरक का प्रयोग विभिन्न फसल चक्रों का प्रयोग, सस्य क्रियाओं में विभिन्न मशीनों का प्रयोग आदि कार्य उनके संभाग के माध्यम से किया जाता है। डॉ. सोम दत्त ने बताया कि संस्थान के पोस्ट हार्विस्ट विभाग में आलू की प्रोसेसिंग से संबंधित कार्य किया जाता है।

कार्यक्रम में स्वागत संबोधन पीआईबी शिमला के सहायक निदेशक संजीव कुमार शर्मा ने दिया जबकि कार्यक्रम के अंत में श्री राजदीप बक्स ने इस कार्यक्रम में सहभागिता हेतु सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान मीडिया दल को संस्थान की एरोपोनिक्स प्रौद्योगिकी के प्रयोगशाला का भ्रमण भी किया। मीडिया दल ने कुफरी जाकर संस्थान की फील्ड गतिविधियों की जानकारी भी हासिल की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *