CAG रिपोर्ट में जल शक्ति विभाग और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
अमर ज्वाला//शिमला
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश में लघु सिंचाई योजनाओं और आपदा राहत फंड (SDRF/NDRF) के उपयोग में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार योजनाओं के क्रियान्वयन, निगरानी, वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं पाई गई हैं।
सिंचाई योजनाओं में योजना से लेकर क्रियान्वयन तक लापरवाही
जल शक्ति विभाग के तहत 2019 से 2023 के बीच की गई ऑडिट में पाया गया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) और राज्य योजनाओं में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हुईं। ₹7,602.95 करोड़ की योजना के मुकाबले सिर्फ ₹804.51 करोड़ की 129 योजनाएं ही स्वीकृत हुईं। कई योजनाओं के डीपीआर बिना जरूरी सर्वे (भू-वैज्ञानिक, जल-विज्ञान, टोपोग्राफिकल) के तैयार किए गए, जिससे योजनाएं अधूरी रहीं या खराब हो गईं। 163 योजनाओं में से केवल 72 पूरी हुईं, जिनमें से 31 योजनाएं 9 से 45 महीने की देरी से पूरी हुईं। 18 योजनाओं में ₹8.83 करोड़ की लागत बढ़ोतरी दर्ज हुई।
टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी, ठेकेदारों से वसूली नहीं रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ₹48.25 करोड़ के कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर ई-टेंडर प्रक्रिया से बचा गया। 13 योजनाओं में कार्य आवंटन में 11 से 66 महीने की देरी हुई। ठेकेदारों से ₹4.41 करोड़ का जुर्माना वसूल नहीं किया गया। ₹2.34 करोड़ की राशि का डायवर्जन और ₹0.94 करोड़ की अनावश्यक बिजली चार्ज वसूले गए।
किसानों को नहीं मिला पूरा लाभ
कई योजनाएं अधूरी या गैर-कार्यात्मक पाई गईं।लाभार्थी सर्वे में केवल 45% किसानों ने पानी की उपलब्धता से संतोष जताया। मात्र 12% किसानों ने किसान विकास संघ (KVS) की कार्यप्रणाली को संतोषजनक बताया। कुल्लू जिले में ₹10.12 करोड़ खर्च होने के बावजूद योजनाएं निष्प्रभावी रहीं।
मंडी को मिला सबसे ज्यादा फंड, अन्य जिलों की अनदेखी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि
PMKSY के तहत 60% से अधिक फंड अकेले मंडी जिले को मिला।
अनुमोदित सिंचाई क्षेत्र (CCA) लक्ष्य से 131% अधिक स्वीकृत किया गया।
आपदा राहत फंड में भी गड़बड़ी
राजस्व विभाग के तहत SDRF और NDRF फंड के उपयोग में भी गंभीर अनियमितताएं पाई गईं:
2019-20 में केंद्र सरकार ने ₹61.07 करोड़ की राशि रोक दी। ₹254.73 करोड़ का NDRF फंड जारी ही नहीं हुआ। ₹122.27 करोड़ बैंक खातों में पड़े रहे, जिससे ब्याज का नुकसान हुआ। ₹11.76 करोड़ गैर-स्वीकृत कार्यों पर खर्च किए गए।
CAG रिपोर्ट में यह सामने आया कि राहत देरी में दी है
90 मामलों में राहत देने में 11 से 33 महीने की देरी हुई। आपदा प्रबंधन योजनाएं अपडेट नहीं की गईं। राज्य आपदा बल में स्टाफ की भारी कमी (326 में से केवल 193 पद भरे)। प्रशिक्षण लक्ष्य पूरे नहीं हुए और करोड़ों रुपये खर्च नहीं किए गए।
वन विभाग में भी गड़बड़ी
वन विभाग की जांच में पाया गया कि जंगलों की गलत श्रेणीकरण के कारण ₹1.33 करोड़ तक की राशि कम आंकी जा सकती है। पेड़ों की सही गणना न होने से CAMPA फंड में नुकसान की आशंका है।
CAG की सिफारिशें
रिपोर्ट में सरकार को कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
योजनाओं से पहले पूर्ण तकनीकी सर्वे अनिवार्य किया जाए।
समय पर कार्य पूरा करने के लिए सख्त अनुबंध प्रणाली लागू हो।
जल उपयोगकर्ता समितियों को मजबूत बनाया जाए।
फंड के दुरुपयोग पर सख्त निगरानी और कार्रवाई हो।
आपदा राहत 30 दिन के भीतर सुनिश्चित की जाए।
