अवैध खनन के 40,757 मामले, योजनाओं और निगरानी में बड़ी खामियां उजागर CAG में बड़ा खुलासा

अमर ज्वाला// शिमला

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश में खनन गतिविधियों के नियमन और प्रबंधन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में खनिज संसाधनों से अच्छी आय होने के बावजूद योजना निर्माण, निगरानी और अवैध खनन पर नियंत्रण में कई स्तरों पर लापरवाही बरती गई।

वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच राज्य सरकार को खनिज रॉयल्टी, किराया और अन्य स्रोतों से कुल ₹1,236.66 करोड़ की आय हुई। यह राज्य के कुल गैर-कर राजस्व का औसतन 9.51% रहा, जिससे खनन क्षेत्र की आर्थिक अहमियत स्पष्ट होती है।

*वार्षिक कार्ययोजना ही नहीं बनाई गई* 

ऑडिट में पाया गया कि पांच वर्षों (2018-23) के दौरान उद्योग विभाग द्वारा वार्षिक योजना के कदम नहीं उठाए गए (AAP) तैयार ही नहीं किया गया। इससे निरीक्षण, राजस्व आकलन, पर्यावरण निगरानी और PMKKKY योजनाओं के कार्यों में समन्वय की कमी रही।

खनिज भंडार का पूरा आकलन नहीं

राज्य में खनिजों की व्यापक सूची तैयार करने का प्रावधान होने के बावजूद अब तक केवल **नदी तटीय खनिजों** तक ही सीमित सर्वे किया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में खनिज भंडार का कोई समग्र आकलन नहीं किया गया, जिससे भविष्य की योजना और राजस्व अनुमान प्रभावित हो रहे हैं।

*खनन पट्टों के आवंटन में देरी और अनियमितता* 

रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि:

कई खनन आवेदन तय समय सीमा के 71 से 118 दिन बाद निपटाए गए

कई मामलों में पट्टा अनुबंध 3 महीने की समय सीमा के बाद साइन किए गए

आवश्यक रजिस्टर (Form E) भी नहीं रखे गए

यह प्रशासनिक कमजोरी और रिकॉर्ड प्रबंधन की खराब स्थिति को दर्शाता है।

बॉर्डर एरिया में नियमों के खिलाफ पट्टे

जिला ऊना के स्वां नदी क्षेत्र में सरकार ने नीतियों के खिलाफ 4 ओपन सेल खनन पट्टे दे दिए। बाद में इन पट्टों में अवैज्ञानिक खनन, अतिक्रमण और पर्यावरण नुकसान सामने आने पर इन्हें रद्द करना पड़ा।

अवैध खनन के 40 हजार से ज्यादा मामले

सबसे चिंताजनक तथ्य यह सामने आया कि 5 वर्षों में राज्य में 40,757 अवैध खनन के मामले पकड़े

सबसे ज्यादा मामले पुलिस द्वारा पकड़े गए

खनन विभाग की निगरानी अपेक्षाकृत कमजोर पाई गई

कोरोना काल में कमी आई, लेकिन 2022-23 में फिर बढ़ोतरी हुई

निगरानी तंत्र कमजोर

रिपोर्ट में कहा गया कि:

तकनीकी निगरानी और फील्ड निरीक्षण पर्याप्त नहीं

अवैध खनन रोकने के लिए ठोस और स्थायी रणनीति का अभाव

विभागों के बीच समन्वय की कमी

सरकार ने मानी कमियां

एग्जिट कॉन्फ्रेंस (मई 2025) में सरकार ने ऑडिट निष्कर्षों को स्वीकार करते हुए सुधार के लिए एक्शन प्लान बनाने का आश्वासन दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *