सुभाष ठाकुर*******
चौहार घाटी के नाम पर पिछले कई दशकों से कई नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते रहे, सत्ता और संगठन में अपनी पकड़ मजबूत करते रहे तथा निजी स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक लाभ अर्जित करते रहे, उसी घाटी की शिक्षा, कृषि, बागवानी और पर्यटन जैसे विकास के मूल क्षेत्रों की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। चुनावी मंचों से विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे, लेकिन आज भी घाटी के सरकारी विद्यालय शिक्षकों और कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि कुछ प्राथमिक विद्यालयों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है, जबकि कई वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय वर्षों से विषय विशेषज्ञों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के बिना संचालित हो रहे हैं। प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बड़े-बड़े दावे कर रही है और हिमाचल प्रदेश को शिक्षा गुणवत्ता के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल बताने से नहीं चूकती। लेकिन मंडी जिले की चौहार घाटी के सरकारी विद्यालयों की जमीनी हकीकत इन दावों पर गंभीर सवाल खडे कर रही है। घाटी की 14 पंचायतों में संचालित प्राथमिक, मिडल, हाई और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय वर्षों से शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। परिणामस्वरूप हजार विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। और अभिभावकों में गहरी चिंता व्याप्त है।
प्राथमिक विद्यालयों में एक भी स्थायी शिक्षक नहीं
सबसे चिंताजनक स्थिति प्राथमिक विद्यालयों की है। जोरला, सरनी, त्रैला, शिल्हबुधानी, हुरंग और फरेहड़ प्राथमिक विद्यालयों में एक भी स्थायी शिक्षक तैनात नहीं है। इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य बनाए रखने के लिए वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों से शिक्षकों को डेप्युटेशन पर भेजा जा रहा है। स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के भविष्य की बुनियाद होती है। यदि इसी स्तर पर नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे तो विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक क्षमता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों और सामाजिक संगठनों ने प्रदेश के शिक्षा मंत्री से चौहार घाटी के विद्यालयों का विशेष सर्वेक्षण करवाने तथा सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौहार घाटी के विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों के दर्जनों नहीं बल्कि सैकड़ों पद रिक्त हैं। यदि समय रहते विशेष भर्ती अभियान चलाकर इन पदों को नहीं भरा गया तो क्षेत्र के हजारों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा और सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा और कमजोर पड़ जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा किसी भी समाज के विकास की आधारशिला है। इसलिए चौहार घाटी के नौनिहालों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार को तत्काल प्रभाव से रिक्त पद भरने, शिक्षकविहीन विद्यालयों में नियमित नियुक्तियां करने तथा दुर्गम क्षेत्रों के स्कूलों के लिए विशेष शिक्षा योजना लागू करने की आवश्यकता है।
द्रंग विधानसभा क्षेत्र में अधिकांश स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों की नींव पूर्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह के कार्यकाल में रखी गई थी। हालांकि पिछले एक दशक में क्षेत्र के विकास कार्यों के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इस दौरान पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर और वर्तमान विधायक पूर्ण चंद ठाकुर के कार्यकाल में भी शिक्षकों के रिक्त पद, स्टाफ की कमी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे पूरी तरह हल नहीं हो सके, जिससे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है।
घाटी के प्रमुख विद्यालयों में रिक्त पदों की स्थिति
बायेरी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय 22 वर्षों से वाणिज्य प्रवक्ता का पद रिक्त: बधेरी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रवक्त। वाणिज्य का पद पिछले 22 वर्षों से रिक्त चल रहा है। इसके अलावा गणित प्रवक्त ।, क्लर्क और जेओए के पद भी खाली है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से पद रिक्त रहने के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
आरंग उच्च विद्यालय: प्रधानाचार्य सहित तीन महत्वपूर्ण पद खाली: आरंग उच्च विद्यालय में प्रधानाचार्य, टीजीटी कला और पीईटी के पद रिक्त हैं। अभिभावकों के अनुसार विद्यालय में स्टाफ की कमी के कारण विद्यार्थियों को नियमित शैक्षणिक गतिविधियों का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सरण वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों के साथ गैर शिक्षण स्टाफ की भी कमी सरण वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में टीजीटी कला, डाइंग शिक्षक, राजनीति विज्ञान प्रवक्ता, वरिष्ठ सहायक, अधीक्षक, क्लर्क और दो चौकीदारों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। विद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों की कमी भी व्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
खल्याहल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय: तीन वर्षों से विषय
विशेषज्ञ नहीं: खल्याहल वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पिछले तीन वर्षों से हिंदी, इतिहास, राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी प्रवक्त। सहित शारीरिक शिक्षक के पद रिक्त हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विषय विशेषज्ञ न होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
कूटगढ़ विद्यालय स्टाफ की कमी से घटाना पड़ा स्कूल का दर्जा कूटगढ़ विद्यालय में शिक्षकों की भारी कमी के कारण विद्यालय का दर्जा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय से घटाकर हाई स्कूल करना पड़ा। वर्तमान में विद्यालय केवल एक कंप्यूटर शिक्षक और एक क्लर्क के भरोसे संचालित हो रहा है।
बरोट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय: 374 विद्यार्थियों के बीच 11 पद खाली: बरोट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में लगभग
11 पद रिक्त हैं। इनमें भौतिक विज्ञान, इतिहास, संस्कृत और कंप्यूटर साइंस प्रवक्ता के अलावा डीपीई, शास्त्री, अधीक्षक ग्रेड-दो, लिपिक, अंशकालीन जलवाहक और वाणिज्य प्रवक्ता के पद शामिल है। स्थानीय लोग इसे शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति मान रहे हैं।
थलङ्खोड़ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय विज्ञान और अंग्रेजी विषय सबसे अधिक प्रभावित थलहूखोड़ वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य, जीवविज्ञान प्रवक्ता, अंग्रेजी प्रवक्त। और कंप्यूटर प्रवक्ता के पद रिक्त हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विज्ञान और अंग्रेजी विषयों के शिक्षक न होने से विद्यार्थियों को सबसे अधिक परेशानी हो रही है।
सुधार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावितः सुधार वरिष्ठ माध्यामिक विद्यालय में प्रधानाचार्य सहित राजनीति विज्ञान, इतिहास, टीजीटी नॉन-मेडिकल, शास्त्री, शारीरिक शिक्षक, ड्राइंग शिक्षक, क्लर्क और चौकीदार के पद खाली पड़े हैं। इससे विद्यालय का शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहा है।
रोपा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय वाणिज्य और कंप्यूटर विषयों के शिक्षक नहीं रोपा वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में वाणिज्य प्रवक्ता के दो पदों सहित अर्थशास्त्र, कंप्यूटर साइंस, शास्त्री, वरिष्ठ सहायक और क्लर्क के पद रिक्त है। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने सरकार से जल्द नियुक्ति यां करने की मांग उठाई है।
धर्मेहड सीनियर स्कैंडरी स्कूल
विद्यालय में छठी से बारहवीं कक्षा तक 63 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां पिछले तीन वर्षों से केवल राजनीति विज्ञान का एक प्रवक्त। ही कार्यरत है, जो कई विषयों की जिम्मेदारी संभाल रहा है। विद्यालय में इतिहास, हिंदी, अंग्रेजी, कंप्यूटर साइंस और शारीरिक शिक्षक के पद रिक्त हैं। इससे वरिष्ठ कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और नामांकन में भी गिरावट आई है।
कथोग वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय 42 विद्यार्थियों की पढ़ाई
एक लाइब्रेरियन के भरोसे कथोग वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की स्थिति सबसे चिंताजनक बताई जा रही है। यहां अंग्रेजी, राजनीति विज्ञान, हिंदी और इतिहास प्रवक्ता सहित शारीरिक शिक्षक, ड्राइंग शिक्षक, शास्त्री, क्लर्क और चौकीदार के पद रिक्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि 42 विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल एक लाइब्रेरियन के भरोसे चल रही है। ग्रामीणों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि चौहार घाटी के विद्यालयों में रिक्त पदों को जल्द भरा जाए ताकि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
*शिक्षा व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल*
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्राथमिक विद्यालय शिक्षकविहीन हों, वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में वर्षों से विषय विशेषज्ञ उपलब्ध न हों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के पद भी खाली पड़े हों, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के दावे वास्तविकता से मेल नहीं खाते। अभिभावकों का आरोप है कि शिक्षकों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी निजी विद्यालयों अथवा अन्य क्षेत्रों के स्कूलों की ओर रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। इससे सरकारी विद्यालयों में नामांकन लगातार प्रभावित हो रहा है।
