दुर्गम राह, अटूट आस्था: पैदल सफर के बीच लछियान गांव में सजा खीर का भंडारा

सुभाष ठाकुर*******

श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना और देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा का भाव पूरे क्षेत्र में विशेष रूप से देखने को मिल रहा है। मंदिरों, चौराहों, विद्यालयों तथा विभिन्न संस्थानों में सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों द्वारा खीर के भंडारों का आयोजन कर श्रद्धालुओं और बच्चों को प्रसाद वितरित किया जा रहा है।

इसी कड़ी में आज मंगलवार को चौहार घाटी की बर्धान पंचायत के दुर्गम लछियान गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, लछियान में भी खीर के भंडारे का आयोजन किया गया। इस आयोजन के लिए गांव के ग्रामीणों ने घर-घर से दूध इक्कठा कर अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया, जिससे पूरे गांव की सामूहिक सहभागिता और धार्मिक आस्था की सुंदर मिसाल देखने को मिली।

विद्यालय के अध्यापक गोपाल ठाकुर के प्रयासों से आयोजित इस भंडारे में स्कूली बच्चों को खीर का प्रसाद वितरित किया गया। गोपाल ठाकुर पिछले कई वर्षों से श्रावण मास में इस प्रकार के सेवा कार्यों के माध्यम से बच्चों में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का संस्कार देने के साथ-साथ सेवा-भाव का भी प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करते आ रहे हैं।

लछियान गांव की सबसे बड़ी चुनौती आज भी सड़क सुविधा का अभाव है। गांव तक पहुंचने के लिए लोगों को सड़क मार्ग से कई किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। यदि गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे दो लाठियों के सहारे कुर्सी पर बैठाकर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, जो आज भी ग्रामीणों की कठिन जीवन परिस्थितियों को दर्शाता है। प्रदेश सरकार को चाहिए कि चौहार घाटी के  लछियान , खवाण, कलहोग, नमाण, त्रवाण विभिन्न पंचायतों के इन गांवों तक सड़क का निर्माण करवाना बेहद जरूरी है।

इसके बावजूद क्षेत्र के लोगों की आस्था तनिक भी कम नहीं हुई है। भले ही उन्हें अपने घर तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता हो, लेकिन चौहार घाटी के देव समाज से जुड़े लोगों की देवी-देवताओं तथा भगवान शिवशंकर के प्रति अटूट श्रद्धा आज भी पहले जैसी ही मजबूत बनी हुई है। श्रावण मास में आयोजित ऐसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम इस बात का प्रमाण हैं कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियां यहां के लोगों की आस्था और सेवा-भाव को कभी कमजोर नहीं कर पाईं।

ग्रामीणों का मानना है कि ऐसे सामूहिक आयोजन न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं, बल्कि समाज में भाईचारे, सहयोग और सेवा की भावना को भी सुदृढ़ करते हैं।

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