आईआईटी मंडी के 14वें दीक्षांत समारोह में 643 विद्यार्थियों को प्रदान की गईं डिग्रियां, शिक्षा को बताया समाज और राष्ट्र परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति
अमर ज्वाला//मंडी
आईआईटी मंडी के 14वें दीक्षांत समारोह में विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यक्रमों के कुल 643 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक एवं अन्य विशेष पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों ने अपने परिजनों और शिक्षकों की उपस्थिति में उपाधियां प्राप्त कीं। पूरा परिसर उत्साह, गर्व और उपलब्धियों के भाव से सराबोर दिखाई दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए आईआईटी मंडी के निदेशक लक्ष्मीधर बेहरा ने स्नातक विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में सफलता की कोई अंतिम सीमा नहीं होती और युवाओं के भीतर असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित न रहकर समाज, राष्ट्र और मानवता के कल्याण के लिए कार्य करने का आग्रह किया।
अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि जीवन में अनेक बार कठिन और अनिश्चित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन प्रत्येक चुनौती व्यक्ति के विकास का अवसर लेकर आती है। उन्होंने भगवद्गीता के श्लोक “योगस्थः कुरु कर्माणि” का उल्लेख करते हुए सफलता और असफलता दोनों में समभाव बनाए रखने की सीख दी। उन्होंने कहा कि सफलता तभी सार्थक है जब उसके साथ विनम्रता, कृतज्ञता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व जुड़ा हो।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि व्यक्ति की चेतना को सार्वभौमिक चेतना से जोड़ने का माध्यम है। जब व्यक्ति अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सार्थक बनता है।
निदेशक ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के परिवर्तन का माध्यम बनना है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिमालय जैसी दृढ़ता, उपनिषदों की स्पष्टता और भगवद्गीता के ज्ञान को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
इस अवसर पर उन्होंने मानव चेतना की असीम संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य केवल एक जैविक इकाई नहीं है, बल्कि उसकी चेतना अनंत ऊंचाइयों तक पहुंचने में सक्षम है। आत्मविकास, ज्ञानार्जन और मानव सेवा ही एक बेहतर समाज और राष्ट्र निर्माण का मार्ग है।
संस्थान की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आईआईटी मंडी में नए छात्रावासों, आवासीय परिसरों, अत्याधुनिक खेल सुविधाओं, मनोरंजन केंद्र और नए मुख्य प्रवेश द्वार सहित कई महत्वपूर्ण विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। हाल ही में लगभग 1400 विद्यार्थियों की क्षमता वाले नए छात्रावास तैयार किए गए हैं, जबकि शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए 350 आवासीय अपार्टमेंटों के निर्माण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
उन्होंने बताया कि संस्थान में अत्याधुनिक इनडोर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल तथा बहुउद्देश्यीय मनोरंजन केंद्र का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे विद्यार्थियों को परिसर में ही आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।
शैक्षणिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए निदेशक ने कहा कि संस्थान ने इस वर्ष कंप्यूटर इंजीनियरिंग, कृषि अभियांत्रिकी एवं डेटा एनालिटिक्स तथा रासायनिक अभियांत्रिकी एवं डेटा एनालिटिक्स जैसे तीन नए बीटेक कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन पाठ्यक्रमों को व्यापक विशेषज्ञ परामर्श और भविष्य की तकनीकी तथा सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने वर्ष 2026 के सभी स्नातकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, ईमानदारी के साथ नेतृत्व करें और करुणा के साथ समाज की सेवा करें। उनका जीवन इस बात का प्रमाण बने कि शिक्षा केवल व्यक्तिगत सफलता का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति है।
