आजादी के 75 साल बाद भी बदहाल ख्वाण, स्कूल में नहीं पहुंची बिजली और सड़क

सुभाष ठाकुर*******

दुर्गम चौहार घाटी की लटराण पंचायत के ख्वाण गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रही है। वर्ष 2013 में स्थापित इस विद्यालय को शुरू हुए करीब 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज तक स्कूल में बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालय तो खोल दिया गया, लेकिन बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण देने के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ख़्वाण गांव से अमर ज्वाला मीडिया संस्थान को दी गई लिखित सूचना कि स्कूल में पिछले 13 वर्षों बिना बिजली से स्कूल का संचालन हो रहा है। शिक्षा विभाग बेकार नौनिहालों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर देंगे जा रहे हैं। इससे यह मालूम हुआ कि शिक्षा विभाग द्वारा समूची चौहार घाटी की शिक्षा व्यवस्था को लेकर न स्थानीय नेता , और प्रतिनिधि गंभीर दिखाई दिए महक घाटी के कुछ नेता घाटी की जनता से महज वोट बैंक की राजनीतिक रोटियां सेकते रहे ,अपनी ठेकेदारी चमकाते रहे लेकिन शिक्षा ,सड़क जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर अपनी आवाज आज तक खामोश रखी गई। जहां इस तरह की व्यवस्था को लेकर अभाव था।
ख़्वाण गांव से अमर ज्वाला मीडिया संस्थान को दी गई लिखित सूचना कि स्कूल में पिछले 13 वर्षों से बिना बिजली  स्कूल का संचालन हो रहा है। शिक्षा विभाग की इस लापरवाही  से यह साफ दिखाई दिया कि नौनिहालों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर  वह खुद  बेहाल दिखाई दे रहे हैं । इससे यह मालूम हुआ कि शिक्षा विभाग द्वारा समूची चौहार घाटी की शिक्षा व्यवस्था को लेकर न स्थानीय नेता , और प्रतिनिधि गंभीर दिखाई दिए , महज घाटी के कुछ नेता घाटी की जनता से महज वोट बैंक की राजनीतिक रोटियां सेंकने तक सीमित रहे ,अपनी ठेकेदारी चमकाते रहे लेकिन शिक्षा ,सड़क जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर अपनी आवाज आज तक खामोश रखी गई। जहां इस तरह की व्यवस्था को लेकर अभाव था।

ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित ख्वाण गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कई किलोमीटर पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सर्दियों के मौसम में क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है तथा मार्च से मई माह तक भी बारिश और ठंड का प्रकोप बना रहता है। ऐसे में विद्यालय के कमरों में अत्यधिक ठंड होने के कारण बच्चों को पढ़ाने के लिए भीतर ही आग जलानी पड़ती है।

ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय में वर्तमान समय में केवल नौ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, लेकिन उनकी शिक्षा व्यवस्था बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संचालित हो रही है। शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को ठंड से बचाने की व्यवस्था भी करनी पड़ती है। बिजली न होने के कारण बादल छाने या मौसम खराब होने पर कमरों में अंधेरा छा जाता है, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती है।

ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी ख्वाण गांव सड़क सुविधा से वंचित है। उनका आरोप है कि पंचायत के चुने हुए प्रतिनिधियों सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने गांव और विद्यालय की समस्याओं की ओर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है कि स्कूल, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं किसी भी ग्रामीण क्षेत्र के विकास की आधारशिला होती हैं, लेकिन ख्वाण गांव आज भी इन सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान वर्तमान विधायक पूर्ण चंद ठाकुर गांव में प्रचार के लिए पहुंचे थे और सड़क निर्माण को लेकर आश्वासन दिए थे। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव समाप्त होने के बाद न तो सड़क निर्माण की दिशा में कोई कार्य हुआ और न ही विधायक गांव में धन्यवाद देने पहुंचे। हालांकि इस संबंध में विधायक पक्ष का मत प्राप्त नहीं हो सका है।

ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि विद्यालय में शीघ्र बिजली की व्यवस्था की जाए, सड़क निर्माण कार्य को प्राथमिकता दी जाए तथा बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि दुर्गम क्षेत्र के नौनिहाल भी आधुनिक शिक्षा से जुड़ सकें।

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