टेंडर 3500 पेड़ों का, निकासी 9000 से अधिक से! हिमाचल के जंगलों में बिरोजा माफिया का खेल बेनकाब
मार्किंग बिना हजारों पेड़ों से निकासी, ब्लैक में बिक रहा बिरोजा; मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज
सुभाष ठाकुर*******
हिमाचल प्रदेश के चिल (चीड़) के जंगल कथित तौर पर वन विभाग, राज्य वन विकास निगम और बिरोजा निकासी करने वाले ठेकेदारों के लिए “मलाई की हांडी” साबित हो रहे हैं। आरोप है कि जंगलों से बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बिरोजा (रेजिन) निकालकर करोड़ों रुपये का कारोबार किया जा रहा है, जिससे राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि पहुंच रही है।
शिकायतकर्ता दीप चंद ने मुख्यमंत्री शिकायत हेल्पलाइन 1100 पर दर्ज शिकायतों में आरोप लगाया है कि मंडी वन विकास निगम के अंतर्गत आने वाले 95 नंबर लॉट वाले जंगल में जहां लगभग 3500 पेड़ों का टेंडर किया गया है, वहीं वास्तविकता में करीब 9000 से अधिक पेड़ों से बिरोजा निकाला जा रहा है। शिकायत के अनुसार क्षेत्र में 11 हजार से अधिक चिल के पेड़ मौजूद हैं और उनमें से बड़ी संख्या में बिना वैधानिक प्रक्रिया के बिरोजा निकासी की जा रही है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि बिना वन विभाग की मार्किंग के छोटे-छोटे चिल के पेड़ों को भी छीलकर उनसे बिरोजा निकाला जा रहा है, जो वन नियमों का खुला उल्लंघन है। उनका कहना है कि इसी प्रकार 88 नंबर लॉट वाले जंगल में भी कथित तौर पर अनियमितताएं चल रही हैं।
दीप चंद द्वारा दर्ज शिकायत संख्या 1321363 और 1321367 में वन विभाग एवं राज्य वन विकास निगम के अधिकारियों पर ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर अवैध बिरोजा कारोबार को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं।
तेजाब की खरीद और इस्तेमाल पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिरोजा निकासी में तेजाब का उपयोग किया जाता है, जिसके लिए वैध लाइसेंस आवश्यक होता है। नियमों के अनुसार जितने पेड़ों का टेंडर होता है, उसी अनुपात में तेजाब खरीदने और उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।
लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि ठेकेदार पंजाब से 35-35 लीटर की बड़ी कैनों में तेजाब खरीदकर ला रहे हैं। जबकि हिमाचल प्रदेश में तेजाब की बिक्री, भंडारण और उपयोग को लेकर सख्त नियम लागू हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जंगलों तक सैकड़ों लीटर तेजाब किसकी अनुमति से पहुंच रहा है और इसकी निगरानी कौन कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि जिले में पॉइजन एक्ट, 1919 तथा हिमाचल प्रदेश पॉइजन (पजेशन एंड सेल) नियम, 2014 के तहत अब तक कुल 28 लाइसेंस जारी किए गए हैं। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठक में बताया कि इनमें केवल तीन लाइसेंस तेजाब की बिक्री एवं भंडारण के लिए, 24 लाइसेंस आभूषण विक्रेताओं के लिए तथा एक लाइसेंस राजकीय महाविद्यालय धर्मपुर के नाम पर जारी किया गया है।
नियमों के अनुसार तेजाब जैसे नियंत्रित रसायनों की खरीद, बिक्री, भंडारण और परिवहन का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि जिले में तेजाब के लाइसेंस सीमित संख्या में जारी हैं, तो बिरोजा निकासी में कथित तौर पर इस्तेमाल हो रहा भारी मात्रा का तेजाब कहां से खरीदा जा रहा है और उसका रिकॉर्ड किस विभाग के पास उपलब्ध है।
300 टीन बिरोजा पकड़े जाने के मामले पर भी उठे सवाल
शिकायतकर्ता ने हाल ही में सुंदरनगर क्षेत्र में 104 नंबर लॉट से जुड़े कथित तौर पर 300 टीन बिरोजा पकड़े जाने के मामले का भी उल्लेख किया है। उनका आरोप है कि इस पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा कि न तो पकड़ी गई गाड़ी का नंबर सार्वजनिक किया गया, न ही संबंधित ठेकेदार का नाम बताया गया और न ही यह जानकारी दी गई कि बरामद बिरोजा किसका था। शिकायतकर्ता के अनुसार कुछ टीनों पर 104 नंबर लॉट अंकित था, जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि संबंधित जंगल से निकला बिरोजा पंजाब की गाड़ी में सुंदरनगर तक कैसे पहुंचा।
कम रेट में टेंडर लेने के पीछे अवैध निकासी का खेल?
शिकायतकर्ता का आरोप है कि प्रदेश में बिरोजा निकासी के टेंडर कई बार 1500 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक की दरों पर लिए जाते हैं, जबकि सरकारी दर 3000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक बताई जाती है। दूसरी ओर यही बिरोजा फैक्ट्रियों में 7000 से 10 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिकता है।
उनका दावा है कि कम दर पर टेंडर लेने का कारण यही है कि बड़ी मात्रा में अवैध रूप से अतिरिक्त पेड़ों से बिरोजा निकालकर ब्लैक मार्केट में बेचा जाता है, जिससे करोड़ों रुपये का कथित भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है।
अधिकारियों से जवाब नहीं
मामले को लेकर राज्य वन विकास निगम के महाप्रबंधक संजय सूद से तीन बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। वहीं मंडी जोन के मंडलीय प्रबंधक चितरंजन को भेजे गए लिखित प्रश्नों का भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों के बाद अब यह देखना होगा कि सरकार और संबंधित जांच एजेंसियां इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाती हैं या नहीं। फिलहाल पूरे मामले ने प्रदेश में बिरोजा निकासी की प्रक्रिया, वन संपदा की सुरक्षा तथा नियंत्रित रसायनों के उपयोग को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।संपादकीय सुझाव: क्योंकि यह पूरी खबर आरोपों पर आधारित है, इसलिए “आरोप”, “कथित”, “शिकायतकर्ता का दावा” जैसे शब्द अवश्य बनाए रखें ताकि खबर तथ्यात्मक और कानूनी रूप से संतुलित रहे।
