टिक्कन सब्जी मंडी की फाइल पर धूल, चौहार घाटी के किसानों की मेहनत पर राजनीति भारी

उपशीर्षक: दस वर्षों से अधर में लटकी सब्जी मंडी, औने-पौने दामों में बिक रही ऑर्गेनिक नकदी फसलें, किसानों का सवाल—आखिर हमारी सुध कौन लेगा?

सुभाष ठाकुर*******

मंडी जिला की चौहार घाटी अपनी जैविक खेती और मेहनती किसानों के लिए प्रदेशभर में पहचान रखती है, लेकिन विडंबना यह है कि वर्षों पहले प्रस्तावित टिक्कन सब्जी मंडी आज भी सरकारी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। टिक्कन सब्जी मंडी निर्माण से घाटी के हजारों किसानों को रोजगार इनकी अपनी ही खेती से उपलब्ध होना था। सब्जी मंडी न होने के कारण अधिकांश किसान अपनी परम्परागत अनाज तथा सब्जियां अपने परिवार के पालन पोषण तक ही खेती बाड़ी करने को मजबूर रहते हैं।

किसानों का आरोप है कि एपीएमसी कार्यालय में इसकी फाइल धूल फांक रही है, जबकि घाटी के हजारों किसान अपनी उपज का उचित मूल्य न मिलने से लगातार आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

इन दिनों चौहार घाटी में मूली की भरपूर पैदावार हो रही है, लेकिन किसानों को केवल 12 से 13 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। बाहरी व्यापारी सस्ते दामों पर उपज खरीदकर बड़े बाजारों में कई गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं, जबकि मेहनत करने वाले किसान को उसकी लागत तक नहीं मिल पा रही।

इसी प्रकार हर वर्ष दो से तीन माह तक जंगली लिंगड़ी , फाफरा,  जो सो प्रतिशत ऑर्गेनिक सब्जी उपलब्ध होता है जिसका बड़ा कारोबार किया जा सकता है, लेकिन किसानों को उसका भी उचित मूल्य नहीं मिलता। मटर ,गोभी, आलू, अरबी ,गलगल , नींबू , जापानी, अखरोट सहित अन्य नकदी फसलें भी बिचौलियों के भरोसे बिक रही हैं। यदि टिक्कन में सब्जी मंडी स्थापित होती, तो किसानों को अपनी उपज का उचित और प्रतिस्पर्धी मूल्य मिल सकता था।

किसानों का कहना है कि पिछले लगभग दस वर्षों से सब्जी मंडी निर्माण की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन धरातल पर कोई कार्य शुरू नहीं हुआ। सरकारें बदलीं, विधायक बदले, लेकिन टिक्कन सब्जी मंडी केवल घोषणाओं तक सीमित रह गई।

किसानों का आरोप है कि द्रंग विधानसभा क्षेत्र के नेताओं की मुख्यमंत्री से निकटता की चर्चा भले ही राजनीतिक मंचों पर होती रही हो, लेकिन उसका लाभ क्षेत्र के किसानों और आम जनता को नहीं मिल पाया। किसानों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों की पहुंच सत्ता के शीर्ष तक है, तो उसका उपयोग क्षेत्र की वर्षों पुरानी विकास योजनाओं को मंजूरी दिलाने और उन्हें धरातल पर उतारने के लिए होना चाहिए था। उनका आरोप है कि यह निकटता यदि केवल राजनीतिक हितों तक सीमित रह जाए और जनता की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी रहें, तो ऐसे संबंधों का आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिलता।

घाटी के लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का अधिक ध्यान राजनीतिक गतिविधियों, शक्ति प्रदर्शन और चुनावी तैयारियों पर रहा, जबकि किसानों की सबसे बड़ी मांग—टिक्कन सब्जी मंडी—आज भी अधूरी है। किसानों का सवाल है कि जब क्षेत्र के विकास की बात आती है तो वर्षों तक फाइलें क्यों अटकी रहती हैं।

किसानों का कहना है कि चौहार घाटी जैसे कृषि प्रधान क्षेत्र में यदि समय रहते सब्जी मंडी का निर्माण नहीं हुआ, तो युवा खेती से विमुख होंगे और जैविक खेती भी प्रभावित होगी। सरकार और एपीएमसी को इस परियोजना को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए।

बरसात के बाद आंदोलन की तैयारी

घाटी के किसानों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि बरसात के बाद भी टिक्कन सब्जी मंडी के निर्माण को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो जिला प्रशासन के समक्ष शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर आंदोलन शुरू किया जाएगा।

बॉक्स 

एपीएमसी मंडी जिला के चेयरमैन संजीव गुलेरिया को भी तीन बार इस मामले पर अवगत करवा चुके हैं।  पिछले महा।  जून माह में उन्हें याद दिलाते हुए फिर कहा कि टिक्कन सब्जी मंडी कब बनाई जा रही है । तब गुलेरिया ने कहा कि निरीक्षण करने आपके साथ जायेंगे।

निरीक्षण जरूर करें लेकिन सब्जी मंडी का का शुरू कर एक ईंट निर्माण में लगा कर राज्य सरकार के नाम द्रंग में विकास कहने को तो होगा।

यदि द्रंग विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों की सत्ता के शीर्ष तक मजबूत पहुंच है, तो फिर चौहार घाटी के किसानों की वर्षों पुरानी टिक्कन सब्जी मंडी की मांग अब तक पूरी क्यों नहीं हुई? आखिर किसानों की मेहनत का सम्मान कब होगा और यह योजना सरकारी फाइलों से निकलकर धरातल पर कब दिखाई देगी?

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