‘एक जिला, तीन उत्पाद’ योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल
अमर ज्वाला//शिमला

हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘एक जिला, तीन उत्पाद’ (ODTP) योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान वाले उत्पादों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना है और यह योजना उसी संकल्प को साकार करने की दिशा में एक अहम पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर विशिष्ट उत्पादों की पहचान कर उन्हें आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर सृजित होंगे। आगामी नई औद्योगिक नीति के माध्यम से भी इस योजना को सहयोग प्रदान किया जाएगा।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार स्थानीय उत्पादों को मजबूत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जिले की बाजार क्षमता और विशेषता के आधार पर तीन प्रमुख उत्पादों का चयन किया जाएगा तथा वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।
योजना के तहत कृषि, बागवानी, हथकरघा और हस्तशिल्प से जुड़े अनेक उत्पादों को शामिल किया जाएगा। इनमें हल्दी, अदरक, मक्का, शॉल, मसाले, कांगड़ा चाय, कांगड़ा चित्रकला, गुच्छी, चुल्ली का तेल, चंबा चप्पल, कुल्लू और किन्नौर शॉल सहित प्रदेश की सांस्कृतिक और कृषि विरासत से जुड़े अन्य उत्पाद शामिल होंगे।
प्रधान सचिव (उद्योग) एम. सुधा देवी ने कहा कि यह योजना राज्य को समावेशी और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि उद्योग विभाग मूल्य संवर्धन, उत्पाद मानकीकरण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादकों, स्वयं सहायता समूहों, शिल्पकारों तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकार का मानना है कि ‘एक जिला, तीन उत्पाद’ योजना न केवल ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने, किसानों और शिल्पकारों की आय बढ़ाने तथा हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक विरासत को संरक्षित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
