कैग रिपोर्ट में 186 नियुक्तियों पर गंभीर सवाल, दस्तावेजों के सत्यापन, पात्रता, आरक्षण और चयन प्रक्रिया की होगी जांच; संकाय पदों की भारी कमी और शोध गतिविधियों पर भी उठे सवाल
अमर ज्वाला // शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में वर्ष 2014 से हुई 186 नियुक्तियों की जांच शुरू हो गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच समिति गठित कर दी है। इस घटनाक्रम के साथ उन मुद्दों पर भी एक बार फिर ध्यान गया है, जिन्हें अमर ज्वाला वर्षों पहले प्रमुखता से प्रकाशित करता रहा था।

अमर ज्वाला ने समय-समय पर हिमाचल प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित शिक्षकों और गैर-शिक्षकों की कथित फर्जी, अपात्र तथा नियमों के विपरीत की गई नियुक्तियों से जुड़े मामलों को विस्तार से प्रकाशित किया था। समाचार पत्र ने पात्रता, चयन प्रक्रिया, अनुभव प्रमाण-पत्रों की वैधता तथा यूजीसी नियमों के पालन को लेकर लगातार सवाल उठाए थे।
अब एचपीयू में गठित जांच समिति 186 नियुक्तियों की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने स्पष्ट किया है कि जिन पूर्व कुलपतियों के कार्यकाल में ये नियुक्तियां हुईं, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी। जांच रिपोर्ट कार्यकारी परिषद (ईसी) के समक्ष रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित पूर्व कुलपतियों को भी बुलाकर उनका पक्ष सुना जाएगा तथा जवाबदेही तय की जाएगी।
कैग की अनुपालन लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण-पत्रों का संबंधित जारीकर्ता संस्थानों से सत्यापन नहीं कराया गया। इसके अलावा एक सहायक प्राध्यापक और एक अतिथि संकाय सदस्य की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के विपरीत पाई गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जांच समिति चयन प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की पात्रता, दस्तावेजों के सत्यापन, आरक्षण नियमों के पालन तथा चयन समितियों की कार्यवाही की विस्तृत समीक्षा करेगी। यह भी जांचा जाएगा कि पूरी भर्ती प्रक्रिया विश्वविद्यालय अधिनियम, यूजीसी विनियमों तथा अन्य निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई गई थी या नहीं।
कुलपति ने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो विश्वविद्यालय नियमानुसार कार्रवाई करेगा। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट कार्यकारी परिषद के समक्ष रखी जाएगी, जहां आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
कैग रिपोर्ट में ये भी सामने आया
भर्ती अनियमितताओं के अलावा कैग रिपोर्ट में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय में 27 से 37 प्रतिशत तक संकाय पद रिक्त हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके अलावा शोध गतिविधियों का कमजोर प्रदर्शन उद्योगों के साथ सीमित समन्वय अकादमिक ढांचे की कमियां तथा संसाधनों के प्रभावी उपयोग की आवश्यकता पर भी रिपोर्ट में चिंता व्यक्त की गई है। कैग ने विश्वविद्यालय में प्रशासनिक सुधार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए आवश्यक कदमउठाने की सिफारिश की है।
