अवैध टैपिंग से निकाला जा रहा बिरोजा कौन खरीद और बेच रहा ?

पर्यावरण प्रेमियों नरेंद्र सैनी व गुमान सिंह ने वन निगम और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए कड़े सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

अमर ज्वाला // मंडी

प्रदेश में वन संपदा से जुड़े कारोबार को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। चीड़ के पेड़ों से बिरोजा (राल) निकालने के लिए की जा रही कथित अवैध टैपिंग को लेकर पर्यावरण प्रेमियों नरेंद्र सैनी और गुमान सिंह ने वन विभाग तथा हिमाचल प्रदेश वन निगम की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। दोनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए यह सवाल उठाया है कि यदि बिरोजे की टैपिंग अवैध तरीके से की जा रही है, तो उससे निकाला जा रहा माल आखिर कौन खरीद रहा है और किस माध्यम से बाजार तक पहुंच रहा है?

पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में नियमों को ताक पर रखकर चीड़ के पेड़ों पर अवैध रूप से टैप लगाकर बिरोजा निकाले जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका कहना है कि यदि यह गतिविधि वास्तव में अवैध है, तो इतने बड़े स्तर पर बिरोजे की निकासी लंबे समय तक बिना निगरानी के कैसे होती रही, यह अपने आप में जांच का गंभीर विषय है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

देव भूमि पर्यावरण संरक्षक के अध्यक्ष नरेंद्र सैनी और  हिमालय नीति अभियान- पर्यावरण एवं मानवाधिकार के अध्यक्ष गुमान सिंह ने संबंधित वन परिक्षेत्राधिकारियों, वन निगम के सहायक प्रबंधकों तथा अन्य संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि चीड़ के जंगलों में बड़े पैमाने पर टैपिंग और बिरोजे की निकासी होने की स्थिति में संबंधित विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पर्यावरण प्रेमियों का सवाल है कि यदि पेड़ों पर टैपिंग और उससे बिरोजे की निकासी निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है, तो कथित अवैध टैपिंग को रोकने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी निगरानी क्यों नहीं हुई?

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत अथवा मीडिया में मामला सामने आने के बाद कई मामलों में छोटी-मोटी क्षति रिपोर्ट काटकर कार्रवाई पूरी कर दी जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि नुकसान बड़े स्तर पर हुआ है, तो क्या केवल क्षति रिपोर्ट काटना पर्याप्त कार्रवाई है या फिर पूरे नेटवर्क की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए?

लाखों पेड़ों से बिरोजा निकासी का दावा, वसूली किससे होगी?

पर्यावरण प्रेमियों ने सबसे बड़ा सवाल यह उठाया है कि यदि वर्षों से बड़े पैमाने पर अवैध टैपिंग होती रही और लाखों पेड़ों से बिरोजा निकाला गया, तो इससे हुए संभावित सरकारी राजस्व नुकसान की भरपाई किससे करवाई जाएगी?

उनका कहना है कि जांच केवल जंगल में अवैध टैपिंग करने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जांच का दायरा बिरोजे की निकासी, संग्रहण, परिवहन, खरीद और बिक्री तक बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि कथित अवैध रूप से निकाला गया बिरोजा आखिर किसके पास पहुंचता है।

बिरोजा खरीदने और बेचने वालों की हो पहचान

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल बिरोजे के कथित अवैध कारोबार की कड़ी को लेकर है। यदि किसी क्षेत्र में अवैध रूप से बिरोजा निकाला गया, तो उसका संग्रह किसने किया? उसे किसने खरीदा? उसका परिवहन किस माध्यम से हुआ और आखिरकार वह किस बाजार या संस्था तक पहुंचा?

नरेंद्र सैनी और गुमान सिंह का कहना है कि जब तक इस पूरी कड़ी की जांच नहीं होगी, तब तक केवल जंगल में टैपिंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई से मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आ सकती।

सरकारी राजस्व को करोड़ों का हो रहा नुकसान की भी हो जांच

पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि संबंधित विभागों द्वारा पिछले वर्षों में बिरोजा टैपिंग और निकासी से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाए। क्षेत्रवार यह भी पता लगाया जाए कि कितने पेड़ों को टैपिंग के लिए चिन्हित किया गया था, कितने पेड़ों से बिरोजा निकाला गया, कितनी मात्रा में बिरोजा एकत्र हुआ और उसका सरकारी रिकॉर्ड में कितना हिसाब दर्ज है।

इसके साथ ही कथित अवैध टैपिंग से सरकारी राजस्व को हुए संभावित नुकसान का भी आकलन किया जाना चाहिए।

जांच से सामने आ सकता है पूरा सच

मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि प्रदेश के किन क्षेत्रों में कथित अवैध टैपिंग हुई, कितनी मात्रा में बिरोजा निकाला गया, उसे किसने खरीदा और बिक्री से जुड़ी पूरी प्रक्रिया क्या रही।

जांच के दौरान यह भी देखा जाना चाहिए कि कहीं संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की लापरवाही, निगरानी में कमी अथवा किसी स्तर पर मिलीभगत तो नहीं हुई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।

पर्यावरण प्रेमियों नरेंद्र सैनी और गुमान सिंह ने सरकार से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाकर जिम्मेदारी तय की जाए। यदि जांच में अवैध टैपिंग, नियमों का उल्लंघन अथवा सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के तथ्य सामने आते हैं, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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