आईआईटी मंडी की ‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल, हिमाचल के 50 स्कूलों तक पहुंचेगा व्यावहारिक विज्ञान का ज्ञान

अंतरिक्ष तकनीक, रोबोटिक्स और जल निस्पंदन के प्रयोगों से रूबरू होंगे विद्यार्थी, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने पर जोर

अमर ज्वाला//मंडी, 26 अक्टूबर

हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूली विद्यार्थियों को विज्ञान की व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ पहल शुरू की है। प्लाक्षा विश्वविद्यालय और इग्नाइटिंग ड्रीम्स ऑफ यंग माइंड्स (आईडीवाईएम) फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस कार्यक्रम के तहत प्रदेश के मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर और कांगड़ा जिलों के 50 विद्यालयों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) के माध्यम से समर्थित इस पहल का शुभारंभ 17 अक्टूबर को आईआईटी मंडी कैंपस स्कूल में किया गया। कार्यक्रम में आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम के तहत कक्षा छठी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, सतत विकास और जल निस्पंदन जैसे विषयों पर प्रयोग आधारित शिक्षा दी जा रही है। प्रत्येक विद्यालय में लगभग छह घंटे की गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने और उनके वास्तविक जीवन में उपयोग जानने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम की गतिविधियां मंडी जिले के बड़ोग, बग्गी (के), बाड़ी गुमाणू, बथेरी और देवरी स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में शुरू हो चुकी हैं। इससे पहले छत्तीसगढ़ और पंजाब के 70 विद्यालयों में 7,500 से अधिक विद्यार्थियों तक यह पहल पहुंच चुकी है।

वैज्ञानिक सोच और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना आवश्यक है, क्योंकि वे आत्मनिर्भर भारत का भविष्य हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रयोगों के माध्यम से सीखने वाले विद्यार्थी आगे चलकर एफएमआरआई मशीन और एटॉमिक फोर्स माइक्रोस्कोप जैसी उन्नत तकनीकों के विकास में भी योगदान दे सकते हैं।

आईआईटी मंडी कैंपस स्कूल के प्रधानाचार्य देशराज शर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगों से परिचित कराने से उनकी सोच का दायरा बढ़ेगा तथा भविष्य में उनके लिए नए अवसर खुलेंगे।

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में हाइड्रो रॉकेट का लाइव प्रक्षेपण मुख्य आकर्षण रहा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को बल, दबाव और गति जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोग के जरिए समझाया गया। विद्यार्थियों ने इसे विज्ञान को नए नजरिए से समझने वाला रोमांचक अनुभव बताया।

समारोह में प्रो. सूर्य प्रकाश उपाध्याय, प्रो. राहुल वैश्य और कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, लॉस एंजिल्स की प्रो. शैली महेंद्र सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रो. शैली महेंद्र ने ‘साइंस ऑन व्हील्स’ टीम के सदस्यों को सम्मानित किया।

परियोजना का नेतृत्व प्लाक्षा विश्वविद्यालय की प्रधान अन्वेषक डॉ. रुचा जोशी कर रही हैं। इसमें आईआईटी मंडी के डॉ. हर्षद कुलकर्णी, प्लाक्षा विश्वविद्यालय के डॉ. शशांक तमास्कर, आईडीवाईएम फाउंडेशन के अध्यक्ष रत्नेश मिश्रा और डॉ. सृजिता चक्रवर्ती भी जुड़े हैं। आईडीवाईएम फाउंडेशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का आधिकारिक स्पेस ट्यूटर है।

आने वाले सप्ताहों में इस पहल को हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों तक विस्तारित करने की योजना है। इसका उद्देश्य दूरदराज के विद्यार्थियों को प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षा उपलब्ध करवाना और उनमें वैज्ञानिक जिज्ञासा, तार्किक सोच, रचनात्मकता तथा नवाचार की भावना विकसित करना है।

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