2023 की आपदा में क्षतिग्रस्त भवन, 2025 में फिर उभरीं बड़ी दरारें; 15 अगस्त को हुआ संयुक्त निरीक्षण, अब एस्टीमेट रिपोर्ट का इंतजार
अमर ज्वाला //पंडोह
द्रंग विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन हटोण स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला का जर्जर भवन अब व्यवस्था की उस तस्वीर को सामने ला रहा है, जिसे नजरअंदाज करना विद्यार्थियों की सुरक्षा पर भारी पड़ सकता है। भवन की दीवारों पर पड़ी दरारें केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की स्थिति और जिम्मेदार व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल हैं।
हटोण स्कूल के दो मंजिला भवन के लगभग सभी कमरों में जगह-जगह दरारें आ चुकी हैं। वर्ष 2023 की आपदा में भवन को नुकसान पहुंचा था और वर्ष 2025 में भी कई हिस्सों में बड़ी दरारें सामने आईं। इसके बावजूद जर्जर भवन को हटाने की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो पाई है। इस स्कूल में नर्सरी से 12वीं कक्षा तक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी अनहोनी की प्रतीक्षा कर रहा है या समय रहते विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?

स्कूल भवन की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद 15 अगस्त को शिक्षा विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। शिक्षा विभाग के उपनिदेशक यशवीर पठानिया के अनुसार जर्जर भवन को गिराने के संबंध में निरीक्षण करवाया गया है और अब लोक निर्माण विभाग की एस्टीमेट रिपोर्ट का इंतजार है। अधिशासी अभियंता दुष्यंत पाल ने भी रिपोर्ट तैयार किए जाने की बात कही है।
लेकिन असली सवाल केवल एस्टीमेट का नहीं, जवाबदेही का है। आखिर 2023 में नुकसान सामने आने के बाद भी 2025 में बड़ी दरारें आने तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? विद्यार्थियों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय में निर्णय लेने में इतनी देरी क्यों हुई?

स्थानीय निवासी मोहन लाल बजीर , दीनानाथ, सोनू, मीरा देवी और उत्तम चंद ने जर्जर भवन को जल्द हटाने तथा स्कूल परिसर में चारदीवारी बनाने की मांग की है। बताया गया है कि स्कूल भवन जिस भूमि पर बना है, वह अभी शिक्षा विभाग के नाम नहीं है। पूर्व में वन संरक्षण अधिनियम से संबंधित मामला तैयार किया गया था, जिसे मंजूरी नहीं मिल पाई। अब दोबारा प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है।
हटोण स्कूल की तस्वीर को केवल एक जर्जर भवन की खबर मानकर छोड़ देना क्षेत्र के भविष्य के साथ न्याय नहीं होगा। पिछले वर्षों में द्रंग विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। जनता को अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो केवल नेताओं और मंत्रियों के पास पुष्पगुच्छ लेकर फोटो खिंचवाने तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य जनसमस्याओं को लेकर सरकार और विभागों से जवाब भी मांगे।
सोशल मीडिया पर स्वयं को जननेता साबित करने से कोई जनसेवक नहीं बन जाता। जनता के बीच मौजूद रहना, समस्याओं की जानकारी रखना, अधिकारियों से जवाब मांगना और समाधान होने तक संघर्ष करना ही नेतृत्व की असली पहचान है।
द्रंग के मतदाताओं को अब यह तय करना होगा कि उन्हें ऐसा नेतृत्व चाहिए जो केवल राजनीतिक पद की इच्छा रखता हो या ऐसा नेतृत्व जो क्षेत्र के विकास के लिए अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति का इस्तेमाल करे।
भ्रष्टाचार पर रोक और नशामुक्त द्रंग के लिए भी चाहिए इच्छाशक्ति
द्रंग के विकास की चर्चा केवल सड़क और भवनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। क्षेत्र में भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोकथाम, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, युवाओं के लिए रोजगार और नशे के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ ठोस अभियान भी राजनीतिक नेतृत्व की प्राथमिकता होनी चाहिए।
जो नेतृत्व भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने, नशे के खिलाफ युवाओं के साथ खड़े होने और सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय करने का साहस रखता है, द्रंग की जनता को ऐसे नेतृत्व की पहचान करनी होगी।
हटोण स्कूल की दरारें व्यवस्था को चेतावनी दे रही हैं। अब जरूरत इस बात की है कि इन दरारों को किसी हादसे के बाद याद न किया जाए, बल्कि **हादसे से पहले कार्रवाई हो। यही विद्यार्थियों की सुरक्षा और द्रंग के भविष्य के प्रति वास्तविक जिम्मेदारी होगी।
