जनगणना ड्यूटी बदलने पर सवाल, खेल प्रतियोगिता के दावे पर विरोधाभास

प्रधानाचार्य बोले—मनाली में कोई विभागीय खेल प्रतियोगिता नहीं, तहसीलदार को दी गई थी खेल प्रतियोगिता की जानकारी

अमर ज्वाला//पधर

जनगणना-2027 के दूसरे चरण के लिए पधर तहसील में लगाई गई शिक्षकों की ड्यूटी में एक के बाद एक किए गए बदलाव अब सवालों के घेरे में हैं। 21 अगस्त को पधर तहसीलदार एवं प्रभारी जनगणना अधिकारी की ओर से जारी आदेश में जनगणना कार्य के लिए नियुक्त प्रगणकों, पर्यवेक्षकों और क्षेत्रीय प्रशिक्षकों को निर्धारित प्रशिक्षण तथा जनगणना कार्य के लिए उपलब्ध रहने के निर्देश दिए गए थे। आदेश में बिना पूर्व अनुमति अनुपस्थित रहने पर कार्रवाई की बात भी कही गई थी।

 

इसके अगले ही दिन 22 अगस्त को जारी आदेश में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोपा के  शारीरिक शिक्षा शिक्षक को प्रगणक पद से हटाकर उनके स्थान पर  प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक को तत्काल प्रभाव से प्रगणक नियुक्त कर दिया गया। आदेश में पहले शिक्षक को हटाने का विस्तृत कारण दर्ज नहीं किया गया है।

मामले में जब राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला रोपा के प्रधानाचार्य से पूछा गया कि क्या विद्यालय का कोई शिक्षक विभागीय खेल प्रतियोगिता के लिए मनाली जा रहा है, तो प्रधानाचार्य ने स्पष्ट किया कि फिलहाल कोई विभागीय खेल प्रतियोगिता नहीं हो रही है और विद्यालय के किसी शारीरिक शिक्षा शिक्षक की मनाली के लिए ऐसी ड्यूटी नहीं लगाई गई है।

वहीं, पधर तहसीलदार एवं प्रभारी जनगणना अधिकारी भावना वर्मा ने बताया कि सामान्य तौर पर एक बार जनगणना ड्यूटी लगने के बाद उसे बदला नहीं जाता। उनके अनुसार, उन्हें जानकारी दी गई थी कि संबंधित शिक्षक की ड्यूटी मनाली में खेल-कूद प्रतियोगिता के कारण लगी हुई है और दूसरे शिक्षक की ड्यूटी भी मनाली के लिए थी। इसी आधार पर ड्यूटी में बदलाव किया गया। तहसीलदार ने यह भी बताया कि एक अन्य शिक्षक की ड्यूटी चिकित्सा संबंधी कारण से बदली गई है।

प्रधानाचार्य और तहसीलदार के बयानों में सामने आया यह अंतर अब पूरे मामले की जांच की मांग कर रहा है। यदि विद्यालय की ओर से मनाली में किसी विभागीय खेल प्रतियोगिता के लिए शिक्षक की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी, तो तहसीलदार कार्यालय को यह जानकारी किसने दी और उसके आधार पर जनगणना ड्यूटी क्यों बदली गई, यह सवाल महत्वपूर्ण है।

जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों की नियुक्ति और उन्हें उपलब्ध करवाने की स्पष्ट व्यवस्था है। ऐसे में यदि किसी शिक्षक को जनगणना ड्यूटी से हटाया जाता है तो उसके पीछे वास्तविक और सत्यापित कारण होना जरूरी है। यदि खेल प्रतियोगिता या चिकित्सा कारण के आधार पर ड्यूटी बदली गई है तो संबंधित विभागीय आदेश, आवेदन और प्रमाण-पत्र अभिलेख में होना चाहिए।

मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या ड्यूटी बदलने के लिए संबंधित शिक्षकों ने लिखित आवेदन दिए थे और क्या उनके बताए कारणों का विभागीय स्तर पर सत्यापन किया गया? यदि किसी शिक्षक ने गलत जानकारी देकर ड्यूटी बदलवाई है तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में सभी कर्मचारियों के लिए समान नियम लागू होने चाहिए। इसलिए संबंधित अभिलेख सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि ड्यूटी में किए गए बदलाव निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुए या किसी गलत जानकारी के आधार पर।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *