11 फिल्मों ने दिखाई सामाजिक सरोकारों, मानवीय संवेदनाओं और समकालीन जीवन की विविध तस्वीरें
अमर ज्वाला//मंडी
शॉख मंडी महोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित इंटरनेशनल सिनेमा फेस्टिवल-2026 का चार दिवसीय आयोजन मंगलवार को मंडी के पड्डल मैदान में संपन्न हो गया। 3 से 6 अक्टूबर तक चले इस फिल्म महोत्सव में स्वतंत्र एवं सार्थक सिनेमा को मंच प्रदान करने के साथ देश-विदेश के फिल्मकारों, कलाकारों और सिनेमा प्रेमियों को एक साझा मंच मिला।
महोत्सव के अंतिम दिन दर्शकों के लिए विभिन्न विषयों और सामाजिक सरोकारों पर आधारित 11 फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। इनमें चप्पल, जवाबों का सफर, ईकोज ऑफ साइलेंस, लाख की चूड़ियां, जोकर, साइलेंस, क्रॉसिंग्स, अल्पविराम, अदम्य, तनुज तथा कवाला शामिल रहीं।
प्रदर्शित फिल्मों में मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों, सामाजिक परिस्थितियों, संघर्ष, मौन, उम्मीद और समकालीन जीवन के विभिन्न पहलुओं को अलग-अलग सिनेमाई शैलियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। फिल्मों को दर्शकों की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली।
महोत्सव में विशिष्ट अतिथियों के रूप में इंद्राणी पांधी, प्रवीण शर्मा ‘पिन्नू’, अभिनेता परितोष सैंड तथा अभिनेत्री सपना सैंड ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। आयोजकों के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य स्वतंत्र और सार्थक सिनेमा को प्रोत्साहित करने के साथ नए फिल्मकारों को अपनी रचनात्मकता प्रस्तुत करने का अवसर उपलब्ध करवाना रहा।
फेस्टिवल डायरेक्टर रामपाल मलिक के नेतृत्व में आयोजित महोत्सव को अध्यक्ष पुष्पराज ‘पुष्पी’, राजेश कुमार, संजय सोनी, रूप उपाध्याय और रजित सिंह कंवर सहित आयोजन टीम के सदस्यों ने सफल बनाने में योगदान दिया।
फिल्मों के मूल्यांकन के लिए गठित ज्यूरी में अशोक मेहरा, संजीव रतन और रितेश मेहता शामिल रहे। ज्यूरी ने फिल्मों के कथानक, निर्देशन, अभिनय, रचनात्मकता और तकनीकी पक्षों का मूल्यांकन किया।
आयोजकों ने कहा कि चार दिवसीय इंटरनेशनल सिनेमा फेस्टिवल ने मंडी के सांस्कृतिक एवं कलात्मक आयोजनों को नई पहचान देने का काम किया है। महोत्सव के माध्यम से स्वतंत्र सिनेमा और विविध रचनात्मक आवाजों को मंच मिला तथा मंडी की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने का अवसर मिला।
आयोजकों ने फिल्मकारों, कलाकारों, ज्यूरी सदस्यों, अतिथियों, मीडिया प्रतिनिधियों, स्वयंसेवकों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से महोत्सव सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।अगर आप चाहें तो इसका और ज्यादा सख्त/आकर्षक अखबारी हैडिंग भी बनाया जा सकता है, जैसे— “पड्डल में चार दिन सिनेमा का संगम, 11 फिल्मों ने छेड़े समाज और संवेदनाओं के सवाल”।
