अमर ज्वाला//शिमला,
हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला ने माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना के नेतृत्व में अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में नए दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए ‘दीक्षारंभ 2026’ ओरिएंटेशन प्रोग्राम शुरू किया। उद्घाटन सत्र नए छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत थी और इसमें उन्हें यूनिवर्सिटी के मूल्यों, आदर्शों और शैक्षणिक संस्कृति से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत डीन (एकेडमिक अफेयर्स) प्रो. (डॉ.) एस.एस. जसवाल के स्वागत भाषण से हुई, जिन्होंने नए छात्रों और उनके अभिभावकों का HPNLU परिवार में गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने यूनिवर्सिटी जीवन में आसानी से ढलने के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम के महत्व पर जोर दिया और छात्रों को यूनिवर्सिटी में उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक और सह-पाठ्यचर्या (co-curricular) अवसरों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
सभा को संबोधित करते हुए, माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीती सक्सेना ने HPNLU में दाखिला पाने पर छात्रों को बधाई दी और उन्हें यूनिवर्सिटी के विज़न, शैक्षणिक ढांचे और संस्थागत उपलब्धियों से परिचित कराया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लॉ की डिग्री हासिल करने के लिए समर्पण, अनुशासन और व्यापक अध्ययन की आवश्यकता होती है। छात्रों को पढ़ने की अच्छी आदतें और बौद्धिक जिज्ञासा विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उन्होंने बताया कि कानूनी शिक्षा केवल क्लासरूम तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए कानूनी घटनाक्रमों, साहित्य और समकालीन मुद्दों के साथ निरंतर जुड़ाव की आवश्यकता होती है। उन्होंने छात्रों को यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक इकोसिस्टम, शोध के अवसरों, सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और छात्रों द्वारा संचालित विभिन्न पहलों से भी परिचित कराया।
जगत गुरु नानक देव पंजाब स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी, पटियाला के कुलपति प्रो. (डॉ.) रतन सिंह ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में नए छात्रों की तुलना ऐसे नन्हे पौधों से की जो अपनी पांच साल की शैक्षणिक यात्रा के दौरान निरंतर सीखने और प्रयास से बड़े होंगे और फल देंगे। उन्होंने छात्रों को देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी की याद दिलाई और वैश्विक समुदाय में भारत की बढ़ती उपस्थिति में योगदान देने में उनकी भूमिका पर जोर दिया। कानूनी शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि कानून एक न्यायपूर्ण, लोकतांत्रिक और सभ्य समाज की नींव बनाता है। उन्होंने आगे कहा कि कानून असल में तर्क, निष्पक्षता और न्याय के ज़रिए लागू की गई सामान्य समझ (common sense) का ही रूप है।
उद्घाटन सत्र का समापन HPNLU के रजिस्ट्रार प्रो. (डॉ.) आलोक कुमार द्वारा दिए गए औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने माननीय कुलपति, विशिष्ट वक्ताओं, फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों, छात्रों और अभिभावकों का उनकी भागीदारी और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन सत्र के बाद, अभिभावकों के साथ पदाधिकारियों का एक बातचीत सत्र (इंटरेक्शन सेशन) आयोजित किया गया, जिसमें डीन (अकादमिक मामले), डीन (छात्र कल्याण) और परीक्षा नियंत्रक ने उन्हें विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे, छात्र कल्याण पहलों और परीक्षा प्रणाली के बारे में जानकारी दी।
इसी दौरान, नए दाखिला लेने वाले छात्रों ने गाइडेड लाइब्रेरी और कैंपस का दौरा किया और विश्वविद्यालय के अकादमिक संसाधनों और सुविधाओं से परिचित हुए।
दोपहर के भोजन के बाद, विश्वविद्यालय के विभिन्न केंद्रों, सेल और समितियों द्वारा इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किए गए, जिनमें छात्रों को HPNLU में उपलब्ध विविध अकादमिक, पेशेवर, सह-पाठ्यचर्या (co-curricular) और छात्र जुड़ाव के अवसरों से परिचित कराया गया। इन सत्रों ने छात्रों को जीवंत संस्थागत इकोसिस्टम और सर्वांगीण विकास के अवसरों की बेहतर समझ हासिल करने में मदद की।
‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का समापन 25 जुलाई 2026 को समापन सत्र के साथ होगा। इस कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के माननीय जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी और हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री पीयूष वर्मा की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। उम्मीद है कि इस समापन सत्र से नए दाखिला लेने वाले छात्रों को कानूनी पेशे, न्यायिक संस्थाओं और कानून की पढ़ाई व प्रैक्टिस से जुड़ी जिम्मेदारियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी मिलेगी।
